बीजेपी के चाणक्य डा. बिंदल का फिर नहीं चला जादू, स्व. वीरभद्र के बाद कांग्रेस ने दोबारा जीती अर्की सीट

बीजेपी के चाणक्य डा. बिंदल का फिर नहीं चला जादू, स्व. वीरभद्र के बाद कांग्रेस ने दोबारा जीती अर्की सीट

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद खाली हो गई थी यह सीट

उपचुनाव में संजय अवस्थी ने 3277 मतों से जीती अर्की की सियासत

कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद अर्की विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी प्रदेश भाजपा में भाजपा विधायक डा. राजीव बिंदल का जादू नहीं चल पाया है। लिहाजा यहां कांग्रेस ने एक बार फिर अर्की की सियासत पर कब्जा जमा लिया है। अर्की में हुए विधानसभा के उपचुनाव में मंगलवार को घोषित चुनाव परिणाम में कांग्रेसी प्रत्याशी संजय अवस्थी ने जीत दर्ज की है।

दरअसल अर्की में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी संजय अवस्थी ने 3277 वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। कांग्रेस प्रत्याशी संजय अवस्थी को इस उपचुनाव में 30493 वोट मिले। जबकि भाजपा प्रत्याशी रत्न सिंह पाल को 27216 वोट मिले। वहीं अन्य निर्दलीय प्रत्याशी जीत सिंह को अर्की उपचुनाव में 543 वोट मिले हैं। यही नहीं अर्की उपचुनाव में नोटा का भी 1622 लोगों ने बटन दबाया हैं, जो कहीं ना कहीं अर्की में भाजपा की हार का कारण भी माना जा रहा है।

बता दें कि अर्की निर्वाचन क्षेत्र में कुल 91,884 मतदातों में से 59,701 ने मतदान किया। इस तरह से अर्की निर्वाचन क्षेत्र में 64.97 फीसदी मतदान हुआ। अर्की में कुल 46,483 पुरुष मतदाताओं में से 30,437 मतदाताओं ने मतदान किया था। इसी तरह अर्की में 45,401 महिला मतदाताओं में से 29,264 मतदान किया था। इसके अलावा 80 वर्ष या इससे अधिक उम्र के बजुर्ग, दिव्यांग, सरकारी कर्मचारी व सेना द्वारा पोस्टल बैल्ट से करीब 800 से अधिक मतदान हुआ था।

यहां बता दें कि भाजपा ने अर्की उपचुनाव के लिए प्रदेश के दिग्गज नेता एवं नाहन के विधायक डा. राजीव बिंदल को प्रभारी बनाया था। राजनीतिक गलियारों में डा. बिंदल को एक बेहतर चुनावी प्रबंधक होने के साथ-साथ चुनावी मैनेजमेंट में चाणक्य भी कहा जाता है। मगर इस उपचुनाव में विधायक डा. राजीव बिंदल का जादू नहीं चला और कांग्रेस ने एक बार फिर अर्की सीट पर चुनावी परचम लहाया है।

उल्लेखनीय यह भी है कि निगर निकायों के चुनाव में भी सोलन में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा था। इस चुनाव में भी डा. बिंदल को पार्टी ने अहम जिम्मेदारी सौंपी है।

कुल मिलाकर प्रदेश में 3 विधानसभा सीटों के अलावा एक मंडी लोकसभा सीट पर कांग्रेस द्वारा जीत दर्ज करने से कहीं न कहीं 2022 में भाजपा के लिए खतरे की घंटी भी बज गई है।

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