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रेडियोलॉजिस्ट का स्वागत करने अस्पताल पहुंचे व्यवस्था परिवर्तन मंच के सदस्य, मांगपूर्ति के लिए किया था संघर्ष

रेडियोलॉजिस्ट का स्वागत करने अस्पताल पहुंचे व्यवस्था परिवर्तन मंच के सदस्य, मांगपूर्ति के लिए किया था संघर्ष

 

व्यवस्था परिवर्तन मंच पांवटा साहिब (इकाई) के द्वारा सिविल हॉस्पिटल पांवटा साहिब में रेडियोलॉजिस्ट के तौर पर डॉक्टर मालविका के ज्वाइन करने पर मंच के सदस्यों ने उनका स्वागत किया।

मंच के संयोजक सुनील चौधरी ने कहा की लगभग साढ़े 7 वर्षों के बाद सिविल हॉस्पिटल पांवटा साहिब को एक स्थाई रेडियोलॉजिस्ट मिला है।

पांवटा साहिब विधानसभा सहित नाहन, रेणुका व शिलाई विधानसभा के लोगों को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए महंगे निजी अस्पतालों में जाना पड़ता था, जिसमें सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ती थी।

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जबकि सरकार के द्वारा गर्भवती महिलाओं के लिए ये सुविधा निशुल्क देने का प्रावधान है। दो वर्षों तक कोरोना महामारी की मार भी गर्भवती महिलाओं को ज्यादा झेलनी पड़ी थी, क्योंकि बिना वाहनों के अल्ट्रासाउंड के लिए निजी अस्पतालों तक पहुंचना मुश्किल होता था।

विदित रहे कि मंच के सदस्यों ने रेडियोलोजिस्ट की मांग को लेकर दिसंबर माह में 11 दिनों तक अस्पताल परिसर के बाहर कड़कड़ाती ठंड में धरना प्रदर्शन किया था।

जिसके परिणास्वरूप उपमंडल अधिकारी, तहसीलदार व मंच के मध्य एक समझौता किया गया कि जब तक सिविल हॉस्पिटल में स्थाई रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं होता, तब तक किसी निजी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के निशुल्क अल्ट्रासाउंड प्रशासन के द्वारा करवाए जाएंगे।

परंतु ऐसा केवल मात्र कुछ ही दिनों तक किया गया और उसके बाद आठ महीनों तक प्रशासन ने आम जनता की कोई सुधबुध नहीं ली।

अधिवक्ता नरेश चौधरी, संदीप लोंगवाल ने कहा कि खुशी का विषय है पांवटा साहिब वासियों के लिए 20 अगस्त को राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा व हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के प्रस्थापित दौरे से पूर्व रेडियोलोजिस्ट की नियुक्ति हो गई है।

मंच ने प्रशासन को चेताया है कि अगर केवल यह नियुक्ति केवल मात्र पूर्व की भांति ही राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री के दौर को लेकर की गई है, तो आने वाले समय में पांवटा की जनता इस का जवाब देगी।

मयंक चौहान, किरण शर्मा ने कहा कि मंच को उम्मीद है कि रेडियोलोजिस्ट स्थाई तौर पर अपनी सेवाएं पांवटा साहिब में देंगी, ताकि पांवटा के लोगो को मंहगे निजी अस्पतालों से निजात मिल सके।

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उन्होंने कहा कि अभी भी कुछ डॉक्टर्स के द्वारा निशुल्क दवाइयां ना लिखकर मंहगी दवाइयां ही आम लोगो को लिखी जा रही है, जबकि अस्पताल परिसर में निशुल्क दवाइयों का उचित भंडार उपलब्ध हैं।

मंच ने कहा अगर ये कमिशन का खेल बंद नहीं हुआ तो इसके खिलाफ मंच को कठोर कदम उठाने पड़ेंगे।

इस मौके पर मंच के संयोजक सुनील चौधरी, अधिवक्ता नरेश चौधरी, मयंक चौहान,अमित कुमार, किरण शर्मा, जगदीप सिंह, कमलजीत सिंह, धर्मपाल, संदीप चौधरी, संदीप लोंगवाल, दिनेश कुमार आदि युवा उपस्थित रहे।

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Written by Newsghat Desk

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