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ओमिक्रोन से घबराइए नहीं, 7 दिन में 98 फीसदी है ठीक होने की दर

ओमिक्रोन से घबराइए नहीं, 7 दिन में 98 फीसदी है ठीक होने की दर

ओमिक्रोन से घबराइए नहीं, 7 दिन में 98 फीसदी है ठीक होने की दर

विश्व भर में क्यों चिंता का विषय है ओमिक्रोन

विश्व महामारी कोरोना के देशभर में फिर मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बीते 24 घंटे में 37 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। देश में 100 से अधिक कोरोना मरीजों की मौत हो गई है।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में कोरोना के 37,379 नए मामले दर्ज किए गए हैं और 124 लोगों की कोरोना के कारण मृत्यु हो गई है। इस दौरान 11,007 रिकवरी हुई हैं। अभी रिकवरी रेट 98.13 प्रतिशत है।

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ओमिक्रोन के देश में अब तक 1892 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 766 लोग ठीक हो गए हैं। अब तक सबसे ज्यादा 568 केस महाराष्ट्र से सामने आए हैं और इसके बाद 382 मामले दिल्ली में दर्ज किए गए हैं।

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भारत के राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक कुल 146.70 करोड़ टीके की खुराक दी जा चुकी हैं। आइए जानते हैं कि ओमिक्रोन वायरस के रोकथाम के लिए सरकार इतना चिंतित क्‍यों है ?

ओमिक्रोन वायरस के कम खतरनाक होने के बावजूद इसके रोकथाम के लिए सरकार इतना ज्‍यादा क्‍यों कवायद कर रही है ? क्‍या भारत में चल रहा टीकाकरण ओमिक्रोन पर प्रभावशाली है।

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इस बारे में यशोदा हास्पिटल के एमडी पीएन अरोड़ा ने बताया कि ओमिक्रोन वैरिएंट लंबे समय तक गले में ठहरता है। इसके चलते वह तेजी से फैलता है।

इसलिए यह संक्रमण के मामले में डेल्‍टा वैरिएंट की तुलना में तीन गुना तेजी से फैल रहा है। उन्‍होंने कहा कि अगर हम सचेत नहीं रहे तो यह वायरस बहुत तेजी से लोगों को अपनी गिरफ्त में ले सकता है।

इससे भले ही खतरा कम हो, लेकिन यह बहुत तेजी से फैलेगा। डा अरोड़ा ने कहा कि यह फेफड़ों में अपनी कापी बहुत तेजी से नहीं बना पाता इसलिए मरीज गंभीर स्थिति में नहीं पहुंचता है। उन्‍होंने कहा कि यही कारण है कि वैरिएंट बहुत तेजी से फैलता है, लेकिन डेल्‍टा वैरिएंट की तरह शरीर को बहुत तेजी से छोड़ भी देता है।

विश्व भर में क्यों चिंता का विषय है ओमिक्रोन

भारत में ओमिक्रोन ने 2 दिसंबर को दस्तक दी थी। पिछले एक सप्ताह में देश में कोरोना संक्रमण की दर लगभग तीन गुना बढ़ गई है। उन्‍होंने कहा कि वायरस के गंभीर लक्षण भले ही कम हों, लेकिन मरीजों की ज्यादा संख्या हमारे लिए खतरे की घंटी है।

अनुमान के मुताबिक, तीसरी लहर की पीक के दौरान 40-60 हजार मरीजों को अस्‍पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है। ये हमारे हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए एक नई चुनौती पैदा कर सकता है।

सरकार की भी यही चिंता है। यह वैरिएंट लोगों को अपनी चपेट में तेजी से ले रहा है। कई देशों में रिकार्ड मामले सामने आ रहे हैं,जिसको लेकर चिंता आम बात है।

टीकाकरण पर क्यों ध्यान दे रही सरकार
कोविड टीकाकरण ने ओमिक्रोन को गंभीर होने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ओमिक्रोन के संक्रमण से शरीर में बनी एंटीबाडी डेल्टा और पिछले अन्य वैरिएंट के खतरे से बचाती है। यह भी अच्छा संकेत है। संक्रमण के बहुत कम मामले ही गंभीर हो रहे हैं।

अमेरिका ने संक्रमित लोगों के लिए क्वारंटाइन की अनिवार्यता को घटाकर पांच दिन कर दिया है। उन्‍होंने कहा कि अब स्थिति वर्ष 2019 जैसी नहीं हैं, स्थिति में बहुत सुधार आया है। डॉ अरोड़ा ने कहा कि दूसरी लहर के पीक के दौरान भारत में हर रोज चार लाख के करीब नए मामले आ रहे थे।

इनमें से करीब 25 हजार को अस्‍पताल में भर्ती करना पड़ा था। माना जा रहा है कि ओमिक्रोन की वजह से रोजाना 16-20 लाख तक नए केसेज आ सकते हैं। इनमें से 40-60 हजार को अस्‍पताल में भर्ती करना होगा। 40-60 हजार लोगों को जब अस्‍पताल में भर्ती करना पड़ेगा तब स्थिति भयावह हो सकती है।

सरकारी आंकड़ों में फिलहाल ओमिक्रोन के कम मामले आ रहे हैं, लेकिन संक्रमितों की संख्या बढ़ सकती है। चूंकि वैरिएंट का पता लगाने के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग करनी होती है और भारत में इसके लिए लैब कम हैं। इस वजह से जांच भी कम हो रही है और आंकड़े भी कम आ रहे हैं।

क्यों जरूरी है सतर्कता

कोरोना के नए वेरियंटअ ओमिक्रोन इस बात की चेतावनी है कि यदि हम सतर्क नहीं हुए तो कोरोना पूरी तरह खत्म नहीं होगा। इसलिए सरकार की गाइड लाइन को सख्‍ती से पालन करने की जरूरत है।

अगर हम ओमिक्रोन को लेकर सावधान रहे तो एक स्थिति ऐसी आएगी, जब संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने या जान जाने के मामले बहुत कम हो जाएंगे और विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे महामारी की श्रेणी से बाहर कर देगा। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि किस स्तर पर डब्ल्यूएचओ ऐसा फैसला करेगा।

Written by Newsghat Desk

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