दुखद: 20 अप्रैल को आना था घर! तिरंगे में लिपटकर लौटा हिमाचल का लाल, 6 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि

लडभड़ोल तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत ऊटपुर के रहने वाले भारतीय सेना के जांबाज नायक सिद्धांत कुमार राणा (शालू) पूरे सैन्य सम्मान के साथ शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गए।

दुखद: 20 अप्रैल को आना था घर! तिरंगे में लिपटकर लौटा हिमाचल का लाल, 6 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि
महाराष्ट्र के अहमदनगर में ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया था। जब उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर पैतृक गांव ऊटपुर पहुंचा तो पूरा क्षेत्र ‘सिद्धांत अमर रहें’ के नारों से गूंज उठा।

महज 34 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कहने वाले सिद्धांत कुमार राणा वर्ष 2012 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और वर्तमान में अहमदनगर में ही ड्यूटी पर तैनात थे।


परिजनों ने बताया कि वे 20 अप्रैल को छुट्टी पर घर आने वाले थे। घर में उनकी वापसी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन गुरुवार सुबह आई उनके निधन की खबर ने सब कुछ उजाड़ दिया।
यह अपने पीछे पत्नी मधु राणा, बुजुर्ग माता सुशीला देवी और दो छोटे बेटे छोड़ गए है। शुक्रवार को जब नायक सिद्धांत का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा तो परिवार का रो-रोकर हाल बेहाल हो गया।


जिसके बाद उनके पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक ले जाया गया, जहाँ उनके 6 वर्षीय बड़े बेटे अरमान ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी, जबकि डेढ़ साल का छोटा बेटा अहान भी पिता को एक टक निहारता रहा।
सेना की टुकड़ी ने अपने साथी को शस्त्र उल्टे कर अंतिम सलामी दी और पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें विदा किया गया।

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