दिवाली पर पटाखे चलाने वालों के लिए जरूरी खबर! रात 10 बजे के बाद आतिशबाजी पर रोक, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई: डीसी सिरमौर
नाहन। दिवाली पर पटाखे चलाने की तैयारी कर रहे लोगों और पटाखा कारोबारियों के लिए जरूरी खबर है। सिरमौर जिला प्रशासन ने त्योहार के दौरान सुरक्षा बनाए रखने, आग लगने की घटनाओं को रोकने और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा ने पटाखों की बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल को लेकर आदेश जारी किए हैं। ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होकर 8 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पटाखे बेचने के लिए लाइसेंस जरूरी
प्रशासन के आदेशों के अनुसार, जिले में पटाखों की बिक्री केवल लाइसेंसधारी दुकानदार ही कर सकेंगे। इसके लिए प्रशासन की ओर से तय स्थानों पर ही दुकानें लगानी होंगी। पटाखों के भंडारण, प्रदर्शन और बिक्री से पहले संबंधित एसडीएम की अनुमति लेना भी जरूरी होगा। बिना लाइसेंस पटाखे बेचने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

दुकानों पर सुरक्षा के इंतजाम अनिवार्य
पटाखों की दुकानों और बिक्री के लिए बनाए गए शेड में आग बुझाने वाले यंत्र और रेत से भरी बाल्टियां रखना जरूरी होगा। दो शेड के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी बनाए रखनी होगी। दुकानों के अंदर तेल के दीपक और मोमबत्तियां जलाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, पटाखों के शेड से 50 मीटर के दायरे में आतिशबाजी का प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा।

रात 10 बजे के बाद नहीं चलेंगे पटाखे
ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए प्रशासन ने पटाखे चलाने के समय और आवाज को लेकर भी नियम तय किए हैं। आदेश के अनुसार, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पटाखे चलाने पर प्रतिबंध रहेगा। निर्धारित सीमा से अधिक आवाज करने वाले पटाखों का इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकेगा।
अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, न्यायालयों और धार्मिक स्थलों के आसपास बनाए गए 100 मीटर के साइलेंस जोन में पटाखे चलाना प्रतिबंधित रहेगा।
अवैध बिक्री पर होगी कार्रवाई
प्रशासन ने अवैध रूप से आयात किए गए पटाखों की बिक्री और भंडारण पर भी रोक लगाई है। संबंधित अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर निरीक्षण व छापेमारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला प्रशासन ने लोगों और पटाखा कारोबारियों से नियमों का पालन करने की अपील की है, ताकि दिवाली का त्योहार सुरक्षित, शांतिपूर्ण और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाया जा सके।



