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Good News: आखिर रंग ले आया हाटी का संघर्ष! हाटी को जनजातियां दर्जा दिलवाने वाला बिल राज्यसभा से भी पारित! गिरीपार जश्न का माहौल

Good News: आखिर रंग ले आया हाटी का संघर्ष! हाटी को जनजातियां दर्जा दिलवाने वाला बिल राज्यसभा से भी पारित! गिरीपार जश्न का माहौल

Good News: आखिर रंग ले आया हाटी का संघर्ष! हाटी को जनजातियां दर्जा दिलवाने वाला बिल राज्यसभा से भी पारित! गिरीपार जश्न का माहौल

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Good News: हिमाचल प्रदेश के गिरिपार क्षेत्र को जनजातियां दर्जा दिलाने के लिए पिछले 5 दशकों से चले आ रहे संघर्ष को 14 सितंबर 2022 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा दिए जाने को मंजूरी प्रदान की थी, और आज राज्यसभा से भी पार्टी बिल पारित हो गया है जिस के शुभ अवसर पर गिरिपार क्षेत्र में भारी उल्लास देखने को मिला है।

Good News: आखिर रंग ले आया हाटी का संघर्ष! हाटी को जनजातियां दर्जा दिलवाने वाला बिल राज्यसभा से भी पारित! गिरीपार जश्न का माहौल

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बुधवार को हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा देने का बिल राज्यसभा से भी पास हो गया, यह बिल लोकसभा में बीते वर्ष 16 दिसंबर को पारित हुआ था।

अब राज्यसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों की 154 पंचायतों के दो लाख लोगों को उनका जनजातीय सांविधानिक अधिकार मिल जाएगा।

केंद्रीय जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने दोपहर बाद राज्यसभा में बिल पेश किया जिसके बाद दो घंटे चर्चा के बाद शाम 4:00 बजे के आसपास बिल पारित हो गया। राज्यसभा से बिल पारित होते ही सिरमौर के ट्रांसगिरि इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई है।

बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, सांसद सुरेश कश्यप, पूर्व विधायक बलदेव तोमर, विधायक रीना कश्यप और पूर्व मंत्री सुखराम चौधरी के प्रयासों से इस मामले में एथनोग्राफिक रिपोर्ट शोध संस्थान के गठन के बाद केंद्र को भेजी थी।

भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा देने का वादा किया था, जिसे भाजपा सरकार ने पूरा कर गिरिपार के हाटी समुदाय को उनका अधिकार दिया है।

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ये रहे मुख्य पहलू

– वर्ष 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हाटी समुदाय की एथनोग्राफिक रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी

– 13 अप्रैल, 2022 को रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया ने समुदाय को जनजाति घोषित करने की मांग को स्वीकृति दी

– 14 सितंबर, 2022 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने समुदाय को जनजाति का दर्जा देने की मंजूरी दी

– 9 दिसंबर को केंद्रीय जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने बिल लोकसभा में प्रस्तुत किया, जिसे 16 दिसंबर को लोकसभा ने पारित किया।

– 26 जुलाई को राज्यसभा में बिल केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने दोपहर बाद प्रस्तुत किया जो अपराह्न 4:00 बजे पारित हो गया।

शिलाई के पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता बलदेव तोमर ने बताया कि गिरीपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा दिलाने के लिए पिछले 5 दशकों से हाटी समुदाय का शांतिपूर्ण संघर्ष लगातार जारी था। जिसको पिछले साल विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद आज राज्यसभा से पारित हुआ है जिसके बाद पूरे ट्रांसगिरी क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।

उन्होंने बताया कि गिरी पार को जनजातीय दर्जा दिलवाने के लिए इस संघर्ष में उनके साथ कई लोग ऐसे थे जो अब उनके बीच नहीं रहे हैं और बावजूद इसके यह संघर्ष शांतिपूर्ण ढंग से ज्यों का त्यों बना रहा है।

गिरीपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा दिलवाने के लिए कई मुश्किलें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा लेकिन ट्रांस गिरी के लोगों ने अपने हाथ पीछे नहीं हटाए।

वहीं, पांवटा साहिब के विधायक एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री चौधरी सुखराम ने कहा कि गिरी पार क्षेत्र को जनजातियां दर्जा दिलवाने में भाजपा की मुख्य भूमिका है।

उन्होंने बताया कि कुछ लोग गिरीपार के जनजातीय होने पर भ्रांतियां फैला रहे थे कि ब्राह्मण समाज को इसका नुकसान होगा लेकिन यह कतई सत्य नहीं है।

गिरिपार जनजातीय दर्जा दिलवाने में भाजपा की मुख्य भूमिका रही है जिसके लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र सिंह मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, सांसद सुरेश कश्यप, सांसद सिकंदर, सांसद इंदु, और गिरिपार को जनजातीय दर्जा दिलवाने के लिए 55 सालों से दिन-रात कड़ी मशक्कत करने वाले गिरी पार के लोगों का विशेष धन्यवाद किया।

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Written by Newsghat Desk

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