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HP High Court Latest Decision: नैशनल हाइवे अथॉरिटी से मुआवजे को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! मुआवजा निर्धारण में देरी को लेकर अदालत ने कही ये बात

HP High Court Latest Decision: नैशनल हाइवे अथॉरिटी से मुआवजे को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! मुआवजा निर्धारण में देरी को लेकर अदालत ने कही ये बात

HP High Court Latest Decision: नैशनल हाइवे अथॉरिटी से मुआवजे को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! मुआवजा निर्धारण में देरी को लेकर अदालत ने कही ये बात
HP High Court Latest Decision: नैशनल हाइवे अथॉरिटी से मुआवजे को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! मुआवजा निर्धारण में देरी को लेकर अदालत ने कही ये बात

HP High Court Latest Decision: नैशनल हाइवे अथॉरिटी से मुआवजे को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! मुआवजा निर्धारण में देरी को लेकर अदालत ने कही ये बात

HP High Court Latest Decision: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है, जिसमें भूमि के मुआवजा निर्धारण में अधिक समय लेने वाले मामलों को गंभीरता से देखा गया है।

यह निर्णय भूमि संपत्ति के मालिकों के लिए अधिक महत्वपूर्ण है, जिनकी भूमि को सरकार ने अधिग्रहण किया है।

HP High Court Latest Decision: नैशनल हाइवे अथॉरिटी से मुआवजे को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! मुआवजा निर्धारण में देरी को लेकर अदालत ने कही ये बात

न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान के अनुसार, मंडलायुक्त पर अत्यधिक बोझ होने के कारण मध्यस्थ को बदलने की जरूरत है।

उन्होंने इस बारे में गंभीरता से विचार करने और समस्या का समाधान पाने के लिए एनएचएआई और केंद्र सरकार को आदेश जारी किया।

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अदालत की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि केंद्र सरकार ने मंडलायुक्त शिमला और मंडी को मध्यस्थ के रूप में नियुक्त किया है, लेकिन वे मामलों का समाधान करने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं। यह भी पता चला है कि कई मामले वर्ष 2015 से अधिक समय से लंबित हैं।

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अदालत ने सुझाव दिया है कि सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीशों या अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों को मुआवजा निर्धारण की शक्तियां प्रदान की जा सकती हैं, जिससे मामलों का समाधान जल्दी हो सके।

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केंद्र सरकार ने पहले ही 2012 में आदेश जारी किया था, जिसमें राजस्व जिलों शिमला और सोलन के लिए मंडलायुक्त शिमला और बिलासपुर, मंडी और कुल्लू के राजस्व जिलों के लिए मंडलायुक्त मंडी को मध्यस्थ के रूप में नियुक्त किया था।

अदालत ने भी उल्लेख किया है कि ऐसी परिस्थितियों में भूमि के मालिकों को बहुत समस्या हो रही है, और वे अपने हक के लिए अदालत में जा रहे हैं। इससे अदालतों पर भी अत्यधिक बोझ बढ़ रहा है।

अदालत ने अंत में यह निर्णय लिया है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि यह प्रत्यक्ष रूप से आम जनता के हितों और उनके अधिकारों से संबंधित है।

जब भूमि का मुआवजा देर से मिलता है या निर्णय में विलंब होता है, तो भूमि मालिकों पर आर्थिक और मानसिक तनाव बढ़ जाता है। इसलिए, ऐसे मामलों में त्वरित और पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करना अत्यंत आवश्यक है।

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Written by newsghat

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