IRDAI New Rules: इंश्योरेंस एक्ट में बदलाव के बाद पॉलिसी धारकों को मिलेगी बड़ी खुशखबरी! जानिए क्या मिलेगा फायदा
IRDAI New Rules: इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (IRDAI) और भारत की प्रमुख बीमा कंपनियों के बीच निवेश नियमों के सुधार को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। जी हां, जल्द ही IRDAI इंश्योरेंस कंपनियों के निवेश के नियमों को लचीला बनाने वाला है।

IRDAI New Rules: इंश्योरेंस एक्ट में बदलाव के बाद पॉलिसी धारकों को मिलेगी बड़ी खुशखबरी! जानिए क्या मिलेगा फायदा
बता दें, मौजूदा निवेश नियम में बीमाधारकों के प्रीमियम का अधिकांश हिस्सा गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है जिससे रिटर्न काफी कम मिलता है और बढ़ती हुई महंगाई की वजह से यह रिटर्न कुछ काम का भी नहीं रहता।
बीमा कंपनियों के पास अब निवेश नियम को बदलने का ज्यादा लचीलापन है, परंतु फिर भी IRDAI निवेश का अधिकतर प्रीमियम गवर्नमेंट सिक्योरिटी में निवेश करने के लिए ही बाध्य करता है। हालांकि इसी को देखते हुए जल्द ही कोई बड़ा फैसला सामने आने वाला है। इस फैसले को अगर हरी झंडी मिल जाती है तो निश्चित ही ग्राहकों को बीमा पॉलिसी में इन्वेस्टमेंट पर ज्यादा रिटर्न मिलेगा।


बीमा कंपनियों की वर्तमान चुनौतियां
भारतीय बीमा कंपनियों का निवेश आज भी ज्यादातर केंद्र और राज्य सरकार के बांड में लगता है जो की सुरक्षित भले होते हैं परंतु रिटर्न बहुत कम होता है। कम रिटर्न की वजह से मुनाफा काफी कम हो जाता है जिसकी वजह से इंश्योरेंस प्रोडक्ट के बीच स्पर्धा प्रभावित होती है। वहीं RBI ने भी सरकारी इंस्ट्रूमेंट पर अत्यधिक निर्भरता को कंसंट्रेशन रिस्क बताया है।
क्या है यह बदलाव का प्रस्ताव
बीमा अधिनियम के अंतर्गत हाल ही में कई बड़े संशोधन किए गए हैं, जिसमें निवेश से जुड़े नियमों को कानून से हटाकर IRDAI को ट्रांसफर कर दिया गया है। अब IRDAI अलग-अलग इंस्ट्रूमेंट में निवेश की सीमा निर्धारित कर सकता है।

इसको लेकर जल्दी ही नई नीतियां तैयार की जाएगी ताकि लचीले ढंग से निवेश को आकार दिया जाए। इससे पहले बीमा कंपनियों निवेश सीमा और दिशा निर्देशों का कानूनी रूप से पालन करना पड़ता था। परंतु अब संसद ने IRDAI को बीमा से जुड़े निवेश का फैसला लेने के लिए स्वतंत्र कर दिया है।
क्या होंगे संभावित बदलाव और नए निवेश विकल्प
● आने वाले समय में IRDAI और बीमा कंपनियां मिलकर हाई क्वालिटी कॉरपोरेट डेब्ट, प्राइवेट कंपनियों के निवेश और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट जैसे कि इंफ्रास्ट्रक्चर, प्राइवेट क्रेडिट फ़ंड इत्यादि में निवेश करने का मन बना रहे हैं।
● यह निवेश विकल्प सरकार के बांड की तुलना में ज्यादा रिटर्न देंगे।
● हालांकि जोखिम भी इनमें ज्यादा होगा परंतु नियमों के अंतर्गत सख्त जोखिम मानदण्ड, क्रेडिट गुणवत्ता और आंतरिक जोखिम नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि बीमा धारकों को ज्यादा रिटर्न और ज्यादा सुरक्षा मिल सके।
इस नियम से क्या लाभ होंगे
● यदि यह नए नियम पारित हो जाते हैं तो अब बीमा धारकों को भी उच्च रेटेड कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश करने का मौका मिलेगा, जिससे आय में सुधार होगा।
● बीमा उत्पादों में लंबी अवधि के बचत प्रोडक्ट ज्यादा बिकेंगे और निवेशकों के लिए यह ज्यादा अच्छे विकल्प होंगे।
● बीमा कंपनियां अब बीमा के साथ-साथ निवेश पोर्टफोलियो भी प्रदान करेंगी जिससे महंगाई के चलते बीमा पॉलिसी भी लाभदायक साबित होगी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर यह नियम भारतीय बीमा क्षेत्र को एक नया दृष्टिकोण प्रदान करेगा। यदि यह नियम लागू हो जाता है तो इंश्योरेंस सेक्टर ज्यादा लचीला और ज्यादा प्रतिस्पर्धात्मक बन जाएगा। हालांकि इस नियम को लागू करने के लिए IRDAI को जोखिम नियंत्रण, क्रेडिट गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा ताकि ज्यादा से ज्यादा निवेशकों को इंश्योरेंस पॉलिसी में इन्वेस्ट करने के लिए आकर्षित किया जा सके।

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