IPS बनीं, फिर भी नहीं रुकीं: सिरमौर की बेटी निधि चौधरी ने बिना कोचिंग के हासिल की UPSC में बेहतर रैंक, IAS की ओर बढ़ा कदम

कहते हैं कि अगर लक्ष्य बड़ा हो तो सफलता मिलने के बाद भी इंसान रुकता नहीं, बल्कि और ऊंचाई की ओर बढ़ता है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की बेटी निधि चौधरी इसकी प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई हैं। IPS बनने के बाद भी उन्होंने अपना सपना नहीं छोड़ा और अब UPSC में बेहतर रैंक हासिल कर IAS बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है।

नाहन विकास खंड के त्रिलोकपुर की रहने वाली 25 वर्षीय निधि चौधरी ने पहले UPSC परीक्षा में 691वीं रैंक हासिल की थी। इस रैंक के आधार पर उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में हुआ और उन्होंने प्रशिक्षण भी शुरू कर दिया।

लेकिन निधि का सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना था। यही कारण रहा कि उन्होंने सफलता मिलने के बाद भी खुद को नहीं रोका और एक बार फिर UPSC परीक्षा की तैयारी में जुट गईं।


बेहतर रैंक हासिल करने के लिए निधि ने हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में चल रहे प्रशिक्षण से एक वर्ष का अवकाश लिया। इस दौरान उन्होंने पूरी तरह से पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया और एक बार फिर परीक्षा दी।
इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 466वीं रैंक हासिल कर अपनी पिछली रैंक में बड़ा सुधार किया। परिणाम सामने आते ही परिवार और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई।


निधि के पिता धनीराम आईटीबीपी में सहायक कमांडेंट हैं और वर्तमान में दिल्ली में तैनात हैं। उनकी माता जसविंदर कौर गृहिणी हैं। परिवार ने हमेशा निधि को पढ़ाई और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया।
पिता की चंडीगढ़ में तैनाती के कारण निधि की शुरुआती पढ़ाई भी वहीं हुई। वह बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रही हैं और हमेशा बड़े लक्ष्य लेकर आगे बढ़ती रहीं। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी में बीएससी ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की है।
निधि की सफलता की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान के की। उन्होंने स्व-अध्ययन, अनुशासन और नियमित पढ़ाई को ही अपनी ताकत बनाया।
लगातार पांचवें प्रयास में मिली यह सफलता उनकी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास की कहानी कहती है। यह उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
निधि इस समय प्रशिक्षण में व्यस्त हैं, इसलिए सीधे बातचीत नहीं हो पाई। लेकिन उनके पिता बताते हैं कि बचपन से ही उनका सपना IAS अधिकारी बनने का था। IPS बनने के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।
आज निधि चौधरी की यह उपलब्धि न केवल सिरमौर जिले, बल्कि पूरे हिमाचल और गुर्जर समाज के लिए गर्व की बात बन गई है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि मेहनत और लगन के आगे कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।



