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Makar Sankranti Health Remedy: मकर संक्रांति पर करें यह चमत्कारी उपाय! साल भर नहीं पड़ेगी दवाई की जरूरत

Makar Sankranti Health Remedy: मकर संक्रांति पर करें यह चमत्कारी उपाय! साल भर नहीं पड़ेगी दवाई की जरूरत

Makar Sankranti Health Remedy: मकर संक्रांति पर करें यह चमत्कारी उपाय! साल भर नहीं पड़ेगी दवाई की जरूरत

Makar Sankranti Health Remedy: मकर संक्रांति पर करें यह चमत्कारी उपाय! साल भर नहीं पड़ेगी दवाई की जरूरत

Makar Sankranti Health Remedy: मकर संक्रांति का त्योहार कोई आम त्यौहार नहीं है। यह वर्ष का सबसे पहला त्यौहार होता है जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के दौरान मनाया जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मतलब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं।

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Makar Sankranti Health Remedy: मकर संक्रांति पर करें यह चमत्कारी उपाय! साल भर नहीं पड़ेगी दवाई की जरूरत

सूर्य देव की किरणें इस दिन से धरती पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढाने लगती हैं। घने कोहरे और ठंड से धीरे-धीरे राहत मिलने लगती है। इसीलिए शास्त्रों और आयुर्वेद में मकर संक्रांति को विशिष्ट दिन माना जाता है। इस दिन पर किए जाने वाले छोटे-छोटे उपाय साल भर आपके शरीर को निरोगी बनाए रखते हैं। जी हां, मकर संक्रांति का दिन एक धार्मिक त्योहार तो होता ही है।

साथ ही यह स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। बदलते मौसम, ठंडी हवाओं और कमजोर इम्यूनिटी से यदि कोई व्यक्ति परेशान है तो इस दिन कुछ साधारण से हल्के-फुल्के उपाय करने से ही शरीर निरोगी होने लगता है और इम्युनिटी बढ़ने लगती है। इसलिए मकर संक्रांति को स्वास्थ्य का संकल्प लेने वाला पर्व भी कहा जाता है ताकि आने वाले 12 महीना तक प्रत्येक व्यक्ति दवाइयों से दूर रहे।

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मकर संक्रांति के दिन किए जाने वाले विशेष उपाय जो शरीर को बनाते हैं निरोगी
तिल गुड़ का सेवन: मकर संक्रांति पर तिल गुड़ खाने की परंपरा केवल एक रस्म नहीं है परंतु यह हमारे पूर्वजों का सोच समझ ज्ञान है। तिल और गुड़ दोनों ही सर्दियों से बचाने वाले महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ होते हैं। इनका सेवन करने से शरीर में गर्मी आती है।

गुड़ हमारे रक्त को शुद्ध करता है। तिल और गुड़ का सेवन जनवरी से लेकर मार्च तक किया जा सकता है, जिससे सर्दी-खांसी, जोड़ों के दर्द और कमजोरी से बचाव होता है। तिल और गुड़ का सेवन रोजाना करने से वात, कफ, पित्त के दोष भी संतुलित होने लगते हैं जो कि शरीर को पूरी तरह से निरोगी बनाता है।

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सूर्य की रोशनी में बैठना: मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देव को समर्पित होता है। इस दिन सूर्य देव को अर्घ देकर पूजा की जाती है। जानकारों का भी मानना है कि सूर्य की रोशनी से विटामिन D मिलता है और यही हमारे बुजुर्गों का कहना था।

सूर्य की रोशनी जहां विटामिन D प्रदान करती है वही एंजायटी और तनाव को भी दूर करती है। क्रॉनिक स्ट्रेस दूर करने में भी सूर्य की रोशनी बहुत बड़ा रोल निभाती है। इसीलिए मकर संक्रांति के दिन सूर्य को अर्घ्य देना और सूर्य की रोशनी में बैठना महत्वपूर्ण माना जाता है।

तिल के तेल से मालिश: मकर संक्रांति का दिन तिल से जुड़ा हुआ होता है। क्योंकि सर्दियों में शरीर में वात बढ़ जाता है इसीलिए जोड़ों के दर्द और नसों की कमजोरी होने लगती है। मकर संक्रांति के दिन से तिल का उपयोग बढ़ा दिया जाता है।

यह पर्व हमें याद दिलाता है कि कैसे प्रकृति ने हर रोग का इलाज पहले ही ढूंढ कर रखा है। इसीलिए यह पर्व तिल को समर्पित है। इस दिन से तिल का सेवन करना, तिल के तेल की मालिश करना शुरू कर दिया जाता है जिससे कमर दर्द, घुटनों का दर्द, नसों में जकड़न दूर होने लगती है।

खिचड़ी का सेवन और दान: खिचड़ी मूंग दाल और चावल से बनती है। ठंडियां लगभग समाप्त होने वाली ही है और अब जल्द ही गर्मियां दस्तक देंगी। इस दौरान गरिष्ठ भोजन करने से बचना चाहिए। इसीलिए मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान और सेवन करने की परंपरा है। मूंग दाल और चावल से बनी खिचड़ी घी डालकर खाने से आपकी आंते मजबूत होती है, पाचन से जुड़ी समस्याएं समाप्त होती हैं और गर्मियों में खिचड़ी किसी वरदान से कम नहीं।

निष्कर्ष
इस प्रकार मकर संक्रांति का पर्व केवल धार्मिक और आध्यात्मिक पर्व नहीं है। बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण दिन भी है जो अपने सांकेतिक रूप में हमें विभिन्न वस्तुओं को अपने दिनचर्या में शामिल करने के लिए बताता है। जैसे कि, तिल, गुड़, तिल का तेल, सूर्य की रोशनी और मूंग-चावल-घी से बनी हुई खिचड़ी जिससे साल भर आप निरोगी रहते हैं।

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Written by News Ghat

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