Himachal News: राष्ट्रव्यापी हड़ताल का हिमाचल में भी असर! मजदूर-कर्मचारी उग्र, बैंकिंग-स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
Himachal News: केंद्र सरकार की कथित मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा बुलाए गए राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर हिमाचल प्रदेश में भी देखने को मिला। प्रदेश में गुरूवार को सीटू के बैनर तले प्रदेश भर में धरने प्रदर्शन किये गए।

Himachal News: राष्ट्रव्यापी हड़ताल का हिमाचल में भी असर! मजदूर-कर्मचारी उग्र, बैंकिंग-स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
प्रदेश में आज हज़ारो बिजली इंजीनियर, कर्मचारी, मजदूर व आउटसोर्स कर्मी पेन और टूल डाउन स्ट्राइक पर है। इससे बिजली, बैंकिंग, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, एलआईसी जैसी सेवाएं प्रभावित हुई।

कहाँ-कहाँ हुआ प्रदर्शन
केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के निजीकरण और 21 नवंबर 2025 से लागू चार नए लेबर कोड के विरोध में वीरवार को राजधानी शिमला में सीटू के बैनर तले विरोध प्रदर्शन किया गया। एमसी पार्क ऊना में विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।


बिलासपुर जिला में भी प्रदर्शन देखने को मिला जहाँ केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ने मोर्चा खोला। इस दौरान वर्कर्स लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में जुटी और धरना-प्रदर्शन शुरू किया गया। उधर, सोलन शहर में सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक ऑटो रिक्शा भी नहीं चलेंगे।
यह कर्मी हड़ताल पर
हिमाचल में आउटसोर्स कर्मी, आईजीएमसी, एम्स चमियाणा, केएनएच, 108 एंबुलेंस सेवाएं, आशा वर्कर, मिड-डे मील, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, नगर परिषद और नगर निगम के आउटसोर्स कर्मी, बिजली परियोजना कर्मी, होटल कर्मी, निर्माण मजदूर, मनरेगा मजदूर, रेहड़ीफड़ी और तहबाजारी यूनियन, उद्योग मजदूर, बैंक कर्मी, बिजली कर्मी, बीएसएनएल, एलआईसी कर्मी हड़ताल पर है।

विरोध का कारण
किसान और ट्रेड यूनियनों ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का विरोध किया है। आरोप है कि यह समझौता अमेरिकी कंपनियों को बढ़त देगा और भारतीय कृषि-बाजार पर दबाव बढ़ाएगा। यूनियनों ने 2025 में लागू चार नए लेबर कोड का भी विरोध किया है जिसने 29 पुराने श्रम कानूनों को बदल दिया था।
यूनियनों का आरोप है कि यह कोड मजदूरों की सुरक्षा कमजोर करते हैं और हड़ताल व यूनियन गतिविधियों पर रोक बढ़ाते हैं। कंपनियों को निकालने-भर्ती में अत्यधिक छूट देते हैं। यूनियनों ने सरकारी उपक्रमों के निजीकरण का विरोध किया है।
PSU (सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम) बेचने से नौकरी का जोखिम बढ़ता है, सामाजिक सुरक्षा घटती है और मजदूरों का भविष्य अस्थिर होता है। कर्मचारियों की मांग है कि OPS वापस लाई जाए और न्यूनतम वेतन में वृद्धि होनी चाहिए। इसके अलावा बिजली संशोधन विधेयक 2025 का भी विरोध हो रहा है। साथ ही कृषि नीतियों में बदलाव की मांग की गई है।
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