Budget 2026 Joint Taxation: शादीशुदा कपल्स को टैक्स में मिलेगी बड़ी राहत! संयुक्त इनकम टैक्स फाइल कर पाएंगे पति-पत्नी
Budget 2026 Joint Taxation: महंगाई, EMI और रोजाना के बढ़ते हुए घरेलू खर्चों के बीच एक और घटक है जो एक आम परिवार पर बोझ बन जाता है वह इनकम टैक्स। ऐसे में इनकम टैक्स 2026 में वित्त मंत्रालय जल्द ही बहुत बड़ी राहत की घोषणा करने वाला है।

Budget 2026 Joint Taxation: शादीशुदा कपल्स को टैक्स में मिलेगी बड़ी राहत! संयुक्त इनकम टैक्स फाइल कर पाएंगे पति-पत्नी
जी हां, बजट 2026 के दौरान हो सकता है कि कैबिनेट में शादीशुदा जोड़ों को जॉइंट टैक्सेशन की सुविधा दी जाए। मतलब अब कमाऊ पति-पत्नी संयुक्त इनकम टैक्स फाइल कर पाएंगे जिससे वह एक बहुत बड़ी रकम बचत के रूप में अपने पास सेव कर पाएंगे। जॉइंट टैक्सेशन की कल्पना कोई नई कल्पना नहीं है।

अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस जैसे देशों में जॉइंट टैक्सेशन के आधार पर ही शादीशुदा जोड़ों से टैक्स लिया जाता है ताकि उनकी पारिवारिक कमाई पर कोई असर न पड़े और उन्हें परिवार चलाने में असुविधा न हो। यही कॉन्सेप्ट अब जल्द ही भारत में भी लागू होगा। इस पूरी प्रक्रिया में पति-पत्नी अब अलग-अलग टैक्स फाइल करने की बजाय एक साथ टैक्स फाइल करेंगे, डिडक्शन का फायदा लेंगे और अतिरिक्त पैसा बचा पाएंगे।


जॉइंट टैक्सेशन के मुख्य फायदे
● जॉइंट टैक्सेशन की वजह से सिंगल इनकम फैमिली को राहत मिलेगी क्योंकि पति-पत्नी में से यदि एक ही कमाता होगा तो वहां टैक्स फ्री लिमिट का पूरा फायदा मिल जाएगा।
● कुल टैक्स के बोझ में भी कमी हो जाएगी क्योंकि पति-पत्नी की आय जोड़कर टैक्स लगता है, जिससे कुल दिनदारी कम हो जाएगी।
● दोनों की बेसिक एक्सेंप्शन लिमिट का बेहतर उपयोग हो पाएगा ताकि टैक्स फ्री इनकम की सीमा बढ़ जाए।
● निवेश डिडक्शन को एक साथ मैनेज करना सरल हो जाएगा और टैक्स की जटिलताएं समाप्त हो जाएंगी।
● अब टैक्स व्यवस्था इंडिविजुअल से परिवार केंद्रित बन जाएगी जो की एक फैमिली फ्रेंडली सिस्टम होगा।
● कम इनकम वाले पार्टनर को ज्यादा फायदा मिलेगा क्योंकि उसका अनयूज़्ड टैक्स बेनिफिट अब काम में आएगा।
● टैक्स रिटर्न फाइलिंग आसान हो जाएगी और यह नियम अंतरराष्ट्रीय टैक्स नियम के अनुरूप बन जाएगा जिससे टैक्स में आधुनिकता आएगी।
● इस नियम की वजह से मिडिल क्लास फैमिली को सीधे तौर पर राहत मिलेगी।

जॉइंट टैक्सेशन से होने वाले नुकसान
● जॉइंट टैक्सेशन की वजह से ड्यूल इनकम कपल्स पर टैक्स बढ़ सकता है खासकर ऊंचे स्लैब वाले दंपति।
● कुछ मामलों में टैक्स सेविंग खत्म होने की भी आशंका बन रही है क्योंकि व्यक्तिगत डिडक्शन का फायदा कम हो जाएगा।
● ऐसी महिलाएं जो कामकाजी है उनका वर्कफोर्स पार्टिसिपेशन प्रभावित भी हो सकता है।
● साथ ही अलग-अलग निवेश और टैक्स रेट रणनीति अपनाने वालों की टैक्स आजादी घट जाएगी।
● इसका मुख्य नुकसान उच्च आय वाले परिवारों को होगा जिन्हें अतिरिक्त टैक्स देना पड़ेगा।
● और सबसे खास बात डायवर्स अलगाव की स्थिति में टैक्स की जटिलता बढ़ जाएगी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर जॉइंट टैक्सेशन का कॉन्सेप्ट फिलहाल भारत के लिए नया है। ऐसे में इसे लागू करने के दौरान विभिन्न चुनौतियों का सामना तो करना पड़ेगा। लेकिन समय के साथ इसमें संशोधन भी किया जाएगा। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि वर्तमान में कैबिनेट जब जॉइंट टैक्सेशन के प्रस्ताव को पारित करेगा तो शुरुआत में इसे विकल्प के रूप में पेश किया जाएगा। अर्थात दंपति चाहे तो इंडिविजुअल टैक्स भरें और चाहे तो जॉइंट टैक्सेशन का लाभ उठाएं।
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