नेरवा में जब एक बच्चे की उम्मीद बनी पुलिस की ज़िम्मेदारी! नन्हे बच्चे ने जीता हिमाचल पुलिस का दिल…
नेरवा पुलिस थाना…
जहाँ एक दिन कोई अपराध नहीं, कोई झगड़ा नहीं
बस एक नन्हा सा बच्चा आया था, आँखों में उम्मीद और दिल में अपने पापा का खोया हुआ फोन।

बच्चे ने अपना नाम बताया— रियार्थ
और पापा का नाम— नरेश

रियार्थ ने मासूमियत से पुलिस को बताया कि
“मम्मी पहले शिकायत देने आई थीं…
लेकिन फोन में सिम नहीं था,
इसलिए वो बंद था… ट्रेस नहीं हो पाया।”


उस नन्हे चेहरे की चिंता ने पुलिसकर्मियों का दिल छू लिया।
पुलिस ने मुस्कराकर रियार्थ से बस इतना कहा
“चिंता मत करो, हम तुम्हारे पापा का फोन ज़रूर ढूंढेंगे।”
ये सुनते ही रियार्थ चला गया…
शायद इस भरोसे के साथ कि
अब उसका काम हो गया है।

कुछ दिन बीते…
और नेरवा पुलिस ने वो कर दिखाया,
जो एक बच्चे से किया गया वादा था।
पापा का खोया हुआ मोबाइल फोन मिल गया।
जब बच्चे से पूछा गया
“कैसा लगा?”
तो रियार्थ ने बस इतना कहा
“अच्छा लगा…”
और उसी पल पुलिस ने महसूस किया कि
उन्होंने सिर्फ एक मोबाइल नहीं,
बल्कि एक बच्चे की उम्मीद लौटाई है।
नेरवा पुलिस ने लिखा—
“वादा किया, वादा निभाया!
हमने सैकड़ों मोबाइल फोन ट्रैक किए हैं,
लेकिन यह मामला दिल को सुकून देने वाला था।
कभी-कभी पुलिस डिपार्टमेंट का हिस्सा बनकर
वाकई बहुत अच्छा लगता है।”
क्योंकि कानून सिर्फ सख़्ती नहीं,
कभी-कभी मासूम मुस्कान भी होता है।


