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मंसूरी में आईएएस प्रशिक्षुओं को आसरा के कलाकारों ने किया सिरमौरी नृत्य से मंत्रमुग्ध

मंसूरी में आईएएस प्रशिक्षुओं को आसरा के कलाकारों ने किया सिरमौरी नृत्य से मंत्रमुग्ध

मंसूरी में आईएएस प्रशिक्षुओं को आसरा के कलाकारों ने किया सिरमौरी नृत्य से मंत्रमुग्ध

संपूर्णानंद सभागार मंसूरी के मंच पर आसरा के कलाकारों का सिरमौरी धमाका

उत्तराखंड के मंसूरी संपूर्णानंद सभागार में आसरा संस्था जालग पझौता सिरमौर के कलाकारों ने सिरमौरी नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर डाला।

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आसरा के कलाकारों ने अपने हुनर और सिरमौरी संस्कृति की मौलिकता को प्रदर्शित करते भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षणार्थियों सहित दर्शकों के सामने सिरमौरी नाटी की विधाओं का प्रदर्शन कर सभी को मंत्रमुग्ध कर डाला।

आसरा संस्था के जोगिंदर हाब्बी ने बताया कि संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के सौजन्य से आसरा संस्था के कलाकारों ने गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत तैयार की गई लोक विधाओं का प्रदर्शन किया।

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हाब्बी ने कहा की आसरा संस्था के गुरु व लोक संगीत व लोक साहित्य कला नृत्य गायन के पुरोधा महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित विद्यानंद सरैक ने मंच संचालन कर सिरमौरी संस्कृति की गरिमा को बयान किया।

इस संस्था के युवा कलाकार विलुप्त प्रायः नृत्यों की वेशभूषा व मुखौटा निर्माण करने वाले लोक नर्तक व हास्य अभिनेता गोपाल हाब्बी सहित सभी कलाकार मंच की शोभा रहे। गोपाल को भी कनिष्ठ वर्ग में संगीत नाटक अकादमी द्वारा उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार 2018 में प्रदान किया गया था।

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जोगिंदर हाब्बी ने कहा कि धर्मपाल व रामलाल सोना के मधुर गीतों व बलदेव की बांसुरी की मनमोहक और सोहनलाल की शहनाई ध्वनि व संदीप एवं रमेश की ढोलक की थाप ने संपूर्णानंद सभागार में खूब धूम मचाई।

नृत्य में सरोज, लक्ष्मी, प्रिया, शिवानी, गोपाल, अमी चंद, चमन, रामलाल ने माला नृत्य का अनोखा प्रदर्शन किया। इसी प्रकार अगली मंचीय प्रस्तुति में परात नृत्य की मनमोहक व दर्शकों को अचंभित करने वाली प्रस्तुति गोपाल, अमीचंद, चमन व जोगेंद्र ने देकर दर्शकों का मनोरंजन किया।

लगभग पौने घंटे की सिरमौरी लोक संगीत नृत्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर डाला। सरैक ने सिरमौरी संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालकर प्रत्येक नृत्य के प्रदर्शन से पूर्व सभागार में बैठे दर्शकों को सिरमौरी लोकगीतों की विस्तार से जानकारी दी। अंत में सिंहटू नृत्य का रंग निराला ही था।

वन्य प्राणी रक्षा और अतीत में ऋषि मुनियों के आश्रम में साधु संतों के पास सभी जीव जंतु और मानव एक साथ नृत्य करते दर्शाया गया।

आज की मानवता का बिखराव और जीव जंतु जो हमारी प्रकृति का खजाना है, उसे संवारने संजोने की गायकी और वन्य प्राणी नृत्य की अंदाज में प्रस्तुति दी, जिसे सभागार में बैठे दर्शकों ने खूब पसंद किया।

विद्वान व प्रशासनिक दर्शकों ने इस आज के इस कार्यक्रम को बेहद पसंद किया और इस प्रस्तुति की भरपूर सराहना की।

Written by Newsghat Desk

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