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स्थिर हुई दालों की क़ीमत, बाजार में आई रौनक

स्थिर हुई दालों की क़ीमत, बाजार में आई रौनक

स्थिर हुई दालों की क़ीमत, बाजार में आई रौनक

कुछ ऐसा रहा है उतार चढ़ाव, वेब पोर्टल से जारी है निगरानी

दालों की खुदरा कीमतों में जून, 2021 से पिछले पांच महीनों में काफी हद तक स्थिरता आ गई है।

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आज की तारीख में चना, अरहर, उड़द और मूंग की कीमतों में पिछले साल की तुलना में या तो गिरावट आई है या स्थिर बनी हुई है।इन खबर के बाद उपभोक्ताओं में खुशी की लहर तो बाजार में रौनक आयी है।

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कुछ ऐसा रहा है उतार चढ़ाव..

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मुद्रास्फीति में भी पिछले पांच महीनों के दौरान जून, 2021 में 10.01 प्रतिशत से अक्टूबर, 2021 में 5.42 प्रतिशत तक लगातार गिरावट देखी गई है।

दालों की मुद्रास्फीति की दर अक्टूबर, 2020 में 18.34 प्रतिशत अधिक थी। इसी तरह, दालों के लिए थोक मूल्य सूचकांक- डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति जून, 2021 में 11.56 प्रतिशत से घटकर अक्टूबर, 2021 में 5.36 प्रतिशत हो गई थी।

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वेब पोर्टल से जारी है निगरानी….

जमाखोरी और दालों की कृत्रिम कमी के कारण मूल्य वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए, सरकार ने 02 जुलाई, 2021 को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत मूंग को छोड़कर सभी दालों पर भंडारण सीमा लागू कर दी।

स्टॉक सीमा आदेश का लाभकारी प्रभाव पड़ा है। कीमतों में कमी के संदर्भ में, 31 अक्टूबर, 2021 से आगे किसी और विस्तार की आवश्यकता नहीं थी।

हालांकि, सावधानी के उपाय के रूप में, वेबपोर्टल के माध्यम से भंडारण की निगरानी जारी है।

मसूर पर शून्य हुआ आयात शुल्क…

प्रमुख दालों में, मसूर पर भारत की आयात निर्भरता अधिक है और घरेलू उपलब्धता तथा कीमतें विदेशी उत्पादन के लिए नाज़ुक हैं।

घरेलू उपभोक्ताओं पर ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों के प्रभाव को कम करने के लिए, सरकार ने 27 जुलाई, 2021 से मसूर पर मूल आयात शुल्क शून्य और एआईडीसी (कृषि अवसंरचना और विकास उपकर) को घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया।

Written by Newsghat Desk

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