

Mutual Fund Regulation Change: 1 जनवरी 2026 से बदल जाएगा निवेश का खेल! REIT’s को मिलेगा इक्विटी का दर्जा
Mutual Fund Regulation Change: भारतीय निवेश बाजार में नया साल एक बहुत बड़े धमाके के साथ शुरू होने जा रहा है। जी हां, SEBI ने हाल ही में एक ऐसा फैसला ले लिया है जो आने वाले समय MF, SIF, और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट की तस्वीर बदल देगा। 1 जनवरी 2026 से रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट को मिलेगा इक्विटी का दर्जा।

Mutual Fund Regulation Change: 1 जनवरी 2026 से बदल जाएगा निवेश का खेल! REIT’s को मिलेगा इक्विटी का दर्जा
जी हां, अब रियल एस्टेट आधारित इन्वेस्टमेंट सीधा इक्विटी क्लास में शामिल होगी बिल्कुल वैसे ही जैसे शेयर मार्केट की कंपनियां। इस नए कदम से म्युचुअल फंड पोर्टफोलियो का पूरा ढांचा बदल जाएगा और रियल एस्टेट निवेश को नई ऊंचाइयां मिल जाएंगी।
बता दें अब तक रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट को अलग कैटेगरी या हाइब्रिड प्रॉपर्टी में रखा जाता था। परंतु 1 जनवरी 2026 से इसे इक्विटी में शामिल किया जाएगा। इक्विटी में शामिल होते ही फंड हाउसेस इसको लेकर नई रणनीतियां बनाने लगेगी और यह फैसला रियल एस्टेट को देगा जोरदार ग्रोथ।

इस पूरे निर्णय के अंतर्गत सबसे खास बात यह है कि अब निवेशकों को पुराने डेब्ट फ़ंड बेचने की मजबूरी नहीं होगी बल्कि फंड हाउस के पास नए पोर्टफोलियो के गठन का भरपूर टाइम होगा।
1 जनवरी 2026 से कौन से नए बदलाव लागू माने जाएंगे


● 1 जनवरी 2026 से म्युचुअल फंड, SIF द्वारा REIT’s में किए गए निवेश को अब इक्विटी माना जाएगा।
● वही इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट ( InvIt’s) को अब भी हाइब्रिड निवेश के रूप में रखा जाएगा।
● हालांकि इस निर्णय से पुराने डेब्ट स्कीम और SIF रणनीतियों के अंतर्गत किए गए निवेशों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वह पहले की तरह स्थिति बनाए रख सकते हैं।
● मतलब इस पूरे नई प्रक्रिया के चलते पुरानी इन्वेस्टमेंट को जबरदस्ती बेचने की कोई आवश्यकता नहीं।
● बल्कि बाजार को स्थिर बनाए रखने के लिए फंड हाउस को भरपूर समय दिया जा रहा है ताकि धीरे-धीरे डेब्ट स्कीम से REIT’s को हटा लिया जाए।

इस फैसले से क्या प्रभाव पड़ेगा?
● इस नए निर्णय की वजह से अब REIT’s इक्विटी निवेश माने जाएंगे जिससे REIT को इक्विटी जैसा लचीला बाजार मिलेगा।
● बड़े फंड हाउस नए पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट (Real Estate Investment) को शामिल कर सकेंगे।
● इस पूरी प्रक्रिया के अंतर्गत फंड हाउस को भरपूर समय दिया जाएगा कि वह तय कर सके कि कब और किस गति से REIT’s को बेचें और इसमें लचीलापन और बाजार की स्थिरता बनाए रखें।
● निवेशक के दृष्टिकोण से भी अब रियल एस्टेट निवेश में उछाल देखा जाएगा और इनमें भी अब शेयर बाजार की तरह उतार चढ़ाव आएंगे।
● यह नया मौका अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को भारत में आकर्षित करेगा।
● म्युचुअल फंड उद्योग को रियल एस्टेट में इन्वेस्टमेंट करने का पूरा मौका देगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर SEBI का यह फैसला भारत के फाइनेंस और निवेश बाजारों के लिए एक बहुत ही बड़ा गेम चेंजर साबित होने वाला है। क्योंकि इस फैसले की वजह से जहां रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट को विस्तार मिलेगा। वही म्युचुअल फंड निवेशकों को भी अब रियल एस्टेट और इक्विटी का मिश्रण मिल सकेगा और अब निवेशक अपने लक्ष्य जोखिम और अवधि को ध्यान में रखते हुए REIT’s को इक्विटी मानते हुए निवेश आरंभ कर सकेंगे।
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