Parenting Tips: बच्चों को तनाव देती है पेरेंट्स की ये गलतियां! छीन लेती हैं उनका Confidence, आज से ही करें सुधार
Parenting Tips: माता-पिता बनना एक बेहद खूबसूरत लेकिन बड़ी ज़िम्मेदारी भरा अनुभव है, जिसमें बच्चों को प्यार, संस्कार, शिक्षा और सुरक्षा देना शामिल है। इसके साथ ही उनके भविष्य की नींव रखना और हर मोड़ पर उनका साथ निभाना भी महत्वपूर्ण होता है। हालाँकि अक्सर यह देखा जाता है कि माता-पिता अपने बच्चे को बेहतर भविष्य देने के लिए कुछ बड़ी गलतियां कर जाते है जोकि बच्चों पर नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालती हैं।

Parenting Tips: बच्चों को तनाव देती है पेरेंट्स की ये गलतियां! छीन लेती हैं उनका Confidence, आज से ही करें सुधार
आज के कॉम्पिटिशन और तेज़ रफ़्तार दौर में बच्चों में तनाव की समस्या बढ़ रही है और इसके पीछे अक्सर पेरेंट्स की वे आदतें होती हैं, जिन्हें वे सामान्य समझते हैं। तो चलिए जानते हैं आज उन आदतों के बारे में जो बच्चों को तनाव में डाल सकती हैं।
पेरेंट्स की मुख्य गलतियाँ


अवास्तविक उम्मीदें और दबाव
ज्यादा उम्मीदें और दबाव बनाना बच्चों के लिए अक्सर तनाव, चिंता और निराशा का कारण बनता है। बच्चों पर पढ़ाई, खेल या किसी भी काम में हमेशा परफेक्ट होने का दबाव डालना और उम्मीदों पर खरा न उतरने पर उन्हें नाकामयाब महसूस कराना। ऐसे में पेरेंट्स को इन गलतियों से बचना चाहिए।
लगातार तुलना करना
अपने बच्चे की भाई-बहनों या दूसरे बच्चों से तुलना करना, जोकि बच्चे के मन में हीनभावना पैदा करते हैं। जब बच्चा सोचने लगता है कि उसके अपने ही माता-पिता उसे दूसरों से कम आंकते हैं, तो उसके आत्म-सम्मान को गहरा ठेस पहुंचता है। वह खुद को कमजोर महसूस करने लगता है, जिससे उसके अंदर हमेशा दूसरों से बेहतर साबित करने की एक अनहेल्दी कॉम्पिटीशन पनपता है।

लगातार आलोचना और डांटना
बच्चों को लगातार डांटना और आलोचना करना उनके आत्मविश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और सीखने की क्षमता को नुकसान पहुँचाता है, जिससे उनमें हीन भावना, तनाव और विद्रोह की भावना पैदा होती है। इसके बजाय, उन्हें प्यार से समझाना, उनकी तारीफ करना और रचनात्मक प्रतिक्रिया देना चाहिए ताकि वे गलतियों से सीख सकें और बेहतर बनें, न कि डरें।
ओवर-कंट्रोलिंग पेरेंटिंग
कुछ माता-पिता बच्चे की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर रखते हैं और हर कदम पर उसे निर्देशित करते हैं। ऐसे माता-पिता बच्चे की हर समस्या को खुद सुलझाने की कोशिश करते हैं, उसके दोस्त चुनते हैं और उसके समय का पूरा हिसाब रखते हैं। इसके कारण बच्चा आत्मनिर्भर नहीं बन पाता। उसे लगातार यह एहसास रहता है कि वह कुछ भी ठीक से नहीं कर सकता, जिससे उसमें फैसले लेने के डर और आत्मविश्वास की कमी पैदा होती है।
गलतियों से सीखने का मौका न देना
बच्चों को गलतियों से सीखने का मौका न देना उन्हें कमज़ोर, आत्मविश्वासी नहीं, और समस्या-समाधान कौशल से वंचित बनाता है। इससे वे हमेशा पूर्णता के डर में जी सकते हैं और जीवन के अनुभवों से सीखकर आगे बढ़ने की क्षमता खो देते हैं, जबकि गलतियाँ विकास, जिम्मेदारी और आत्म-सुधार के लिए ज़रूरी हैं। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को असफलता से बचाएँ नहीं, बल्कि उन्हें गलतियों पर चर्चा करने, जिम्मेदारी लेने और सुधार के तरीके खोजने के लिए प्रोत्साहित करें, जिससे वे ‘ऑप्टिमिस्टिक लर्नर’ बनें।

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