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Broken Mutual Fund Portfolio: बाजार हाई है पर रिटर्न फिर भी नहीं? जाने कहां हो रही गलती

Broken Mutual Fund Portfolio: बाजार हाई है पर रिटर्न फिर भी नहीं? जाने कहां हो रही गलती

Broken Mutual Fund Portfolio: बाजार हाई है पर रिटर्न फिर भी नहीं? जाने कहां हो रही गलती

Broken Mutual Fund Portfolio: बाजार हाई है पर रिटर्न फिर भी नहीं? जाने कहां हो रही गलती

Broken Mutual Fund Portfolio: म्युचुअल फंड निवेशकों को अक्सर यह सवाल सताता है कि जब शेयर बाजार रिकॉर्ड हाई पर है तो फंड इतना कमजोर प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं? सेंसेक्स और निफ्टी आए दिन नए-नए रिकॉर्ड छू रहे हैं तो निवेशक को कम प्रॉफिट क्यों मिल रहा है?

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Broken Mutual Fund Portfolio: बाजार हाई है पर रिटर्न फिर भी नहीं? जाने कहां हो रही गलती

इसकी वजह एकदम साफ है बाजार तेज होने के बावजूद भी आपके पोर्टफोलियो में कुछ गलती हो रही है। जी हां, खराब रिटर्न मिलने का मतलब यह नहीं होता कि हर बार इसमें बाजार की गलती है। कई बार निवेशकों के चयन की वजह से भी रिटर्न पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

जी हां, अक्सर निवेशक यही सोचते हैं कि खराब रिटर्न यानी बाजार में गिरावट। लेकिन ऐसा नहीं है, असली समस्या छुपी होती है निवेश की गलत फैसलों में, गलत फंड का चयन करना, जरूरत से ज्यादा स्कीम में इन्वेस्ट करना, बिना एनालिसिस के सालों तक निवेश को ऐसे ही छोड़ देना और इसी की वजह से पोर्टफोलियो खराब होने लगता है।

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पोर्टफोलियो खराब होने या टूटने के कारण
निवेश की गलत शुरुआत: कई निवेशक फंड चुनते समय ही 1 से 3 साल के रिटर्न देखते हैं और पुराने प्रदर्शन के आधार पर ही फंड का चयन कर पैसा लगा देते हैं। परंतु इस बाजार में तो हर पल एक नया बदलाव आता है। ऐसे में सही फ़ंड का चयन करने के लिए फंड मैनेजमेंट प्रक्रिया और पोर्टफोलियो की तीव्रता देखनी पड़ती है।

खरीद लिया और भूल गए: म्युचुअल फंड में कई निवेशक ऐसे होते हैं जो म्युचुअल फंड को खरीदने के बाद समीक्षा ही नहीं करते। पोर्टफोलियो चेक नहीं करते, इसमें कोई बदलाव नहीं करते, जिसकी वजह से आपका पोर्टफोलियो खराब रिटर्न ही खींचता रहता है।

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पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन ना होना: पिछले कुछ समय में अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर जोड़ना निवेशकों के लिए काफी फायदेमंद सिद्ध हुआ है। ऐसे में बाजार को ध्यान में रखकर पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन करना बेहद जरूरी है। परंतु कई निवेशक आज भी इक्विटी में ही पैसा लगाकर शांत बैठ जाते हैं जो की सबसे बड़ी गलती होती है।

ओवर डायवर्सिफिकेशन होना: जिस प्रकार डायवर्सिफिकेशन ना होना जोखिम बढाता है, वैसे ही ओवर डायवर्सिफिकेशन भी नुकसान का कारण बनता है। क्योंकि परफॉर्मेंस ओवरलैप होने लगते हैं। जिसकी वजह से पोर्टफोलियो रिस्क मैनेजमेंट नहीं कर पाता और ना ही प्रॉफिट को संभाल पता है।

एसेट एलोकेशन फ्रेमवर्क की कमी: एक मजबूत पोर्टफोलियो की सबसे महत्वपूर्ण बात होती है ऐसेट एलोकेशन स्ट्रेटजी, मतलब इक्विटी ग्रोथ के लिए, गोल्ड जोखिम कम करने के लिए, डेब्ट और फिक्स इनकम को संभालनने के लिए, परंतु कुछ निवेशक भावनाओं में आकर निर्णय लेते हैं जो कि नुकसान का कारण बनता है।

कमजोर पोर्टफोलियो में सुधार कैसे करें

● यदि आपका पोर्टफोलियो कमजोर है और इसी की वजह से रिटर्न सही तरीके से नहीं आ रहा तो अब आपके पोर्टफोलियो को एक सही रिव्यू की जरूरत है
● ऐसे में सबसे पहले जांचें की क्या आपके फंड स्ट्रेटजी के मुताबिक सेट किए हुए हैं?
● किस फंड में कैपिटल की जरूरत है?
● कौन से फंड को हटाना जरूरी है?
● आपने क्या ऐसेट एलोकेशन की है और आगे ऐसेट एलोकेशन की क्या रणनीति होनी चाहिए?
● साथ ही आज के वर्तमान मार्केट में आपने क्या गोल्ड और सिल्वर में निवेश किया है?

निष्कर्ष
यदि आपको भी कम रिटर्न मिल रहा है तो सबसे पहले बाजार नहीं बल्कि अपने पोर्टफोलियो को रिव्यू करें और सही समय पर सही निर्णय लेकर नुकसान से बचें।

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Written by News Ghat

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