HP News: हिमाचल में प्राकृतिक खेती का बढ़ा क्रेज! नीलम और प्रेमलता की बढ़ी आमदनी, आर्थिकी में हुआ सुधार

HP News: प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रयास रंग लाने लगे हैं। राज्य में प्राकृतिक खेती से उत्पादित अनाज पर देशभर में सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। ‘सुक्खू सरकार’ किसानों को उनकी मेहनत का उचित सम्मान व फसल का बेहतर दाम प्रदान कर एक नई मिसाल कायम कर रही है।

HP News: हिमाचल में प्राकृतिक खेती का बढ़ा क्रेज! नीलम और प्रेमलता की बढ़ी आमदनी, आर्थिकी में हुआ सुधार
मंडी जिला में दो साल में ही लगभग 78 लाख रुपए के लाभ इन किसानों को प्रदान किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसी का परिणाम है कि गत तीन वर्षो में जिला मंडी में 23291 नए किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं।

जिला मंडी में वर्तमान में 48,380 किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। सरकार द्वारा इस वर्ष के बजट में प्राकृतिक विधि से उत्पादित गेहूं का समर्थन मूल्य 60 से बढ़ाकर 80 रुपए प्रति किलोग्राम, मक्की का समर्थन मूल्य 40 से बढ़ाकर 50 रुपए प्रति किलोग्राम, हल्दी का समर्थन मूल्य 90 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 150 रुपए प्रति किलोग्राम करने पर प्रदेश सहित मंडी जिला के किसान भी खुशी से चहक रहे हैं।


पहली बार अदरक का समर्थन मूल्य 30 रुपए प्रति किलोग्राम घोषित किया गया है। सरकाघाट के धनालग गांव की नीलम, सुंदरनगर की प्रेमलता, बल्ह के घट्टा गांव की लीला देवी तथा करसोग की गीता का कहना है कि प्राकृतिक विधि से उपजाए अनाजों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी से उनकी आर्थिकी में सुधार आ रहा है और किसानों की जीविका साधन सुदृढ़ करने की दिशा में यह बेहतर कदम है।
मुख्यमंत्री की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने हल्दी, गेहूं तथा अदरक के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है।


कृषि विभाग आत्मा मंडी के परियोजना निदेशक डॉ. राकेश पटियाल ने बताया कि जिला मंडी में वर्ष 2024-25 में प्राकृतिक खेती करने वाले 328 किसानों से 651.33 क्विंटल मक्का, 15 किसानों से 2.922 मीट्रिक टन कच्ची हल्दी तथा 152 किसानों से 290.67 क्विंटल गेहूं खरीदा गया। वर्ष 2025-26 में प्राकृतिक खेती करने वाले 192 किसानों से 389.48 क्विंटल मक्का तथा 236 किसानों से 230 क्विंटल कच्ची हल्दी खरीदी गई।
अगले माह से किसानों से गेहूं की खरीद शुरू की जाएगी। सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह भी निर्णय लिया है कि गेहूं को प्रापण केंद्र तक लाने पर उन्हें 200 रुपए प्रति क्विंटल ढुलाई का अतिरिक्त भुगतान किया जा रहा है। यह कदम विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों के लिए अत्यंत राहत भरा सिद्ध हो रहा है।
मंडी जिला में प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की खरीद के लिए कृषि विभाग ने मंडी सदर, पधर, सुंदरनगर, जोगिंदरनगर, सरकाघाट व धर्मपुर में छह प्रापण केंद्र स्थापित किए हैं। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (आत्मा) के उप-परियोजना निदेशक हितेंद्र ठाकुर ने बताया कि जिला मंडी में वर्ष 2024-25 के दौरान 495 किसानों के खातों में 37 लाख पांच हजार 816 रुपए मक्का, गेंहू और हल्दी की खरीद के लिए हस्तांतरित किए गए।
वर्ष 2025-26 में 428 किसानों के खाते में 40 लाख 17 हजार 124 रूपये मक्की और हल्दी की खरीद के लिए हस्तांतरित किए गए, जबकि गेहूं की खरीद अगले माह से 6 प्रापण केंद्रों पर की जानी प्रस्तावित है। उन्होंने अन्य किसानों से भी प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।
उपायुक्त अपूर्व देवगन का कहना है कि प्रदेश सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना को मूर्तरूप प्रदान करते हुए मंडी जिला में अधिकतर किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जा रहा है। सरकार द्वारा समय-समय पर प्राकृतिक उत्पादों का समर्थन मूल्य बढ़ाया जा रहा है, जिसका समय पर किसानों तक लाभ हस्तांतरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

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