मुख्यमंत्री सुक्खू का ऐलान: बोले- जब तक कांग्रेस सरकार, ओपीएस नहीं होगी बंद! भाजपा सांसद व विधायक को घेरा
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बिलासपुर जिला के झंडूता विधानसभा क्षेत्र के बरठीं में एक विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि मुझ पर ओपीएस बंद करने का दबाव है, लेकिन मैं इस दबाव के आगे नहीं झुका। भाजपा की सरकार ने राजस्थान में आते ही सरकारी कर्मचारियों की ओपीएस को बंद करना का निर्णय ले लिया है।

मुख्यमंत्री सुक्खू का ऐलान: बोले- जब तक कांग्रेस सरकार, ओपीएस नहीं होगी बंद! भाजपा सांसद व विधायक को घेरा
लेकिन जब तक हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है, तब तक ओपीएस बंद नहीं होगी। हालाँकि केंद्र सरकार ने ओपीएस लागू करने पर 1600 करोड़ रुपए की मदद बंद कर दी। हम युवाओं को रोजगार दे रहे हैं लेकिन केन्द्र की भाजपा सरकार ने प्रदेश को अग्निवीर दिए। उन्होंने कहा कि दस वर्ष में केंद्र सरकार ने प्रदेश के सैनिकों को अग्निवीर बनाकर छोड़ दिया।

क्या किसी न सोचा कि चार साल बाद युवा क्या करेंगे? उन्होंने कहा कि पहली बार हिमाचल प्रदेश के निचले क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी का मुख्यमंत्री बना। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं कि कभी आम परिवार से निकल कर प्रदेश की सेवा करने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने जनता के पांच हजार करोड़ रुपये लोगों में बांटने की बजाय राजनीतिक लाभ के लिए खर्च किए।


वर्तमान सरकार से पिछली भाजपा सरकार को 50 हजार करोड़ अधिक मिला और 50 हजार करोड़ कर्ज के तौर पर लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने आय के संसाधन पैदा किए और भ्रष्टाचार के दरवाजों को बंद किया। वर्तमान सरकार ने 23 हजार करोड़ रुपए कर्ज लिया और 26 हजार करोड़ रुपए ब्याज और मूलधन वापिस किया।
सुक्खू ने कहा कि संविधान के प्रावधानों के मुताबिक 73 साल से हिमाचल प्रदेश को ग्रांट मिल रही थी लेकिन अब इसे बंद कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश में 68 प्रतिशत वन भूमि है और लोग 32 प्रतिशत भूमि पर गुजारा करते हैं। लेकिन इस बात को नजर अंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि एक फरवरी हिमाचल प्रदेश के इतिहास का काला दिन है, जब केंद्र सरकार ने हर साल मिलने वाले लगभग दस हजार करोड़ रुपये की ग्रांट बंद कर दी।

उन्होंने कहा, ‘‘आज भाजपा के सांसदों और विधायकों से पूछा जाना चाहिए, क्या पांच साल में न मिलने वाले 50 हजार करोड़ के विरुद्ध आवाज उठाएगें? इसके विरुद्ध प्रदेश की जनता को आवाज उठानी पड़ेगी क्योंकि यह लोगों के अधिकारों पर डाका है। हम यह लड़ाई जनता के सहयोग से लड़ेंगे। हिमाचल के अधिकारों के लिए हम भाजपा विधायकों के नेतृत्व में दिल्ली जाने को तैयार हैं।
आज मैं मुख्यंमत्री हूं, कल कोई और होगा लेकिन हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई सर्वोपरि है।’’मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के दौरान 9300 करोड़ रुपए नुकसान का आकलन केंद्र सरकार की टीम ने किया लेकिन भाजपा के सांसद संसद में खामोश रहे। भाजपा सांसदों ने एक भी सवाल संसद में नहीं पूछा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं हर आपदा प्रभावित क्षेत्र में गया। मैं झंडूता भी आया।
किसी ने माँग नहीं की लेकिन लोगों के दर्द को देखते हुए हमने घर गिरने पर मिलने वाले मुआवजे को डेढ़ लाख रुपए से बढ़ाकर सात लाख रुपए किया। शहर में दस हजार और गांवों में पांच हजार रुपए किराया दिया। आम आदमी का दर्द बांटना ही व्यवस्था परिवर्तन है।’’ उन्होंने कहा कि भाजपा ने लोकतंत्र को खरीदने और सरकार गिराने का प्रयास किया गया। नौ विधायक सरकार को छोड़ कर चले गए।
देश के इतिहास में पहली बार आजाद विधायक इस्तीफा स्वीकार करवाने के लिए धरने पर बैठ गए। लेकिन जनता के आशीर्वाद से कांग्रेस फिर से चालीस की संख्या पर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की सोच से लोगों को रोजगार देने के लिए मनरेगा शुरू की, लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार ने इस योजना की आत्मा को ही समाप्त कर दिया। इस कदम से रोजगार के अवसरों को केंद्र सरकार ने छीन लिया। लेकिन भाजपा के सारे सांसद चुप हैं।
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