Vijaypat Singhania Dies: नहीं रहे ‘विजयपत सिंघानिया! 12000 करोड़ का साम्राज्य, एक साइन और कौड़ी-कौड़ी को हुए मोहताज़

Vijaypat Singhania Dies: भारत के दिग्गज उद्योगपति विजयपत सिंघानिया का 28 मार्च 2026 को मुंबई में 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से देश भर में शोक का माहौल पसर गया। क्योंकि विजयपत सिंघानिया भारत के टेक्सटाइल इंडस्ट्री के पायनियर कहे जाते हैं।

Vijaypat Singhania Dies: नहीं रहे ‘विजयपत सिंघानिया! 12000 करोड़ का साम्राज्य, एक साइन और कौड़ी-कौड़ी को हुए मोहताज़
उन्होंने भारत के टेक्सटाइल इंडस्ट्री को वह सुनहरा दौर दिया जिसके चलते टेक्सटाइल इंडस्ट्री को ग्लोबल लेवल पर शामिल किया गया। विजयपत सिंघानिया केवल एक सफल बिजनेसमैन ही नहीं थे बल्कि वे एक ऐसे इंसान थे जिन्होंने अपनी मेहनत से 12000 करोड़ का अंपायर खड़ा किया।

कौन थे विजयपत सिंघानिया
विजयपत सिंघानिया रेमंड ग्रुप के पूर्व अध्यक्ष और भारत के टेक्सटाइल उद्योगपतियों में से एक गिने जाते हैं। इन्होंने ‘रेमंड ग्रुप’ का 1980 से 2000 तक नेतृत्व किया और कंपनी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। विजयपत सिंघानिया के कार्यकाल में रेमंड केवल एक कपड़ों की ब्रांड नहीं थी बल्कि थे ‘कंपलीट मैन’ जैसी पहचान के साथ देश-विदेश में मशहूर हो गई।


रेमंड ने वूलन और डेनिम जैसे अन्य सेक्टर में भी कदम रखा। विजयपत सिंघानिया केवल एक बिजनेसमैन ही नहीं थे बल्कि उन्हें एविएशन का भी शौक था। उन्होंने हॉट एयर बलून से ऊंचाई का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया था। उनके इसी योगदान की वजह से उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण अवार्ड से सम्मानित भी किया गया था।
12000 करोड़ का साम्राज्य और फिर भी किराए के घर में कटी जिंदगी
विजयपत सिंघानिया ने अपने दम पर 12000 करोड़ का साम्राज्य बना लिया था। रेमंड ग्रुप ऐसी इंडस्ट्री थी जिसने देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी ग्लोबल पहचान बना ली थी। उनकी यह कंपनी इंटरनेशनल मार्केट में अपनी पहचान स्थापित कर चुकी थी। कंपनी को मल्टी सेक्टर बिजनेस में भी बदला जा चुका था।


लेकिन 2015 के आसपास विजयपत सिंघानिया ने अपनी पूरी जायदाद अपने बेटे गौतम सिंघानिया के नाम कर दी। यहां तक की कंपनी की सारी जिम्मेदारी भी एक साइन कर अपने बेटे को सौंप दी। बस यही उनकी सबसे बड़ी गलती थी। क्योंकि बेटे ने उन्हें चुटकियों में पूरे बिजनेस से अलग कर दिया और घर से निकाल दिया। इसके बाद विजयपत सिंघानिया को किराए के घर में जिंदगी बितानी पड़ी।
पिता-पुत्र का विवाद और टूटा रिश्ता
कंपनी का कंट्रोल बेटे को सौंपने के बाद विजयपत सिंघानिया और गौतम सिंघानिया में विवाद शुरू हो गया। विजयपत सिंघानिया का आरोप था कि बेटे ने उन्हें कंपनी से पूरी तरह से अलग कर दिया, उनके फैसलों को महत्व नहीं दिया जा रहा। बेटे ने पिता से जो वादे किए वह पूरे नहीं किए थे। यहां तक की विजयपत सिंघानिया को उनके खुद के घर से बेदखल कर दिया गया। जिसके बाद विजयपत सिंघानिया एक किराए के घर में कौड़ी-कौड़ी को मोहताज वाली जिंदगी जी रहे थे।
28 मार्च 2026 को दुनिया को कह दिया अलविदा
28 मार्च 2026 को विजयपत सिंघानिया ने आखिरकार उम्र संबंधित समस्याओं के चलते इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन की खबर आते ही भारत समेत दुनिया भर के बिजनेस जगत में शोक की लहर दौड़ गई। कई उद्योगपतियों और नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि प्रदान की। उद्योग जगत के लिए यह बहुत बड़ी क्षति मानी जा रही है। हालांकि आज ससम्मान मुंबई में उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। अंतिम संस्कार के दौरान विजयपत सिंघानिया के बेटे और उनकी बेटियां और पूरा परिवार मौजूद था।
निष्कर्ष
विजयपत सिंघानिया की जिंदगी एक ऐसी कहानी है जिसमें सफलता, सम्मान, विवाद और सीख सब कुछ शामिल है। उनका निधन केवल एक उद्योगपति का जाना नहीं बल्कि एक स्वर्णिम युग का अंत भी है। वह अपने पीछे एक मजबूत विरासत छोड़ गए हैं।

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