बद्री विशाल और सेना का अनोखा रिश्ता: क्यों बद्रीनाथ के रावल को देती है गढ़वाल राइफल्स आधिकारिक वाहन
बद्रीनाथ धाम केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय सेना के गौरव से भी गहराई से जुड़ा है। यही वजह है कि बद्रीनाथ के मुख्य पुजारी रावल जी को भारतीय सेना विशेष सम्मान देती है।

बद्री विशाल और सेना का अनोखा रिश्ता: क्यों बद्रीनाथ के रावल को देती है गढ़वाल राइफल्स आधिकारिक वाहन
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम का भारतीय सेना, खासकर गढ़वाल राइफल्स से ऐतिहासिक और धार्मिक संबंध रहा है। बद्रीनाथ भगवान को गढ़वाल राइफल्स का Principal Deity माना जाता है।

गढ़वाल राइफल्स का प्रसिद्ध युद्ध घोष “बद्री विशाल लाल की जय” इसी आस्था का प्रमाण है। युद्धभूमि में भी सैनिक बद्री विशाल का स्मरण करते हैं।


रावल जी, जो बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री विशाल की पूजा करते हैं, सेना की दृष्टि में भगवान के प्रतिनिधि माने जाते हैं। इसी कारण उन्हें विशेष सम्मान दिया जाता है।
परंपरा के अनुसार, जब रावल जी यात्रा पर होते हैं, तो भारतीय सेना उन्हें आधिकारिक वाहन उपलब्ध कराती है। यह व्यवस्था वर्षों से चली आ रही है।

चमोली जैसे ऊंचाई वाले और दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में सुरक्षा सबसे बड़ी आवश्यकता होती है। सेना की गाड़ी रावल जी की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करती है।
अक्सर यह वाहन गढ़वाल राइफल्स द्वारा उपलब्ध कराई गई स्कॉर्पियो होती है। जवान इसे सेवा भाव से निभाते हैं, न कि औपचारिक ड्यूटी की तरह।
यह परंपरा केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। यह सम्मान, आस्था और विश्वास का प्रतीक है। बद्रीनाथ धाम के रावल परंपरागत रूप से केरल से आते हैं। यह व्यवस्था उत्तराखंड और दक्षिण भारत के सांस्कृतिक एकीकरण को भी दर्शाती है।
आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित इस परंपरा ने देश की विविध संस्कृतियों को एक सूत्र में पिरोया है। आज भी सेना और बद्रीनाथ धाम का यह संबंध जीवंत है। आस्था और राष्ट्रसेवा का यह संगम भारतीय परंपराओं की अनूठी मिसाल पेश करता है।
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