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उपलिब्ध: चमियाना अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल! EUS सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी का किया उपयोग, मरीजों को बड़ी सुविधा

उपलिब्ध: चमियाना अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल! EUS सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी का किया उपयोग, मरीजों को बड़ी सुविधा

उपलिब्ध: चमियाना अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल! EUS सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी का किया उपयोग, मरीजों को बड़ी सुविधा

उपलिब्ध: चमियाना अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल! EUS सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी का किया उपयोग, मरीजों को बड़ी सुविधा

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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटी (एआईएमएसएस) में ईयूएस सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी सुविधा शुरू हो गई है, जिससे ईयूएस सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी पैन्क्रियाटाइटिस मरीजों को अब उपचार के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पडेगा।

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उपलिब्ध: चमियाना अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल! EUS सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी का किया उपयोग, मरीजों को बड़ी सुविधा

AIMSS के डॉक्टरों ने पहली बार उन्नत एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS) निर्देशित उपचार की प्रक्रिया का उपयोग कर दो मरीजों की एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड निर्देशित सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी का उपयोग करने की उपलब्धि हासिल की है। चमियाना अस्पताल में इस बीमारी से पीड़ित एक युवती और एक पुरुष उपचार के लिए पहुंचे थे।

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उनके पेट में बहुत अधिक द्रव पदार्थ जमा हो गया था जिससे पेट दबना, तेज़ दर्द, उल्टी और वह कुछ भी नहीं खा पा रहे थे। जिसके बाद इन दोनों मरीजों को गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के चिकित्सकों की टीम ने ईयूएस गाइडेड सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी ऑपरेशन से सफलतापूर्वक उपचार दिया।

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टीम में यह रहे शामिल
AIMSS के प्राचार्य और चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. बृज शर्मा की अगुवाई में ईयूएस सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया है। टीम में डॉ. आशीष चौहान, डॉ. जगरूप, डॉ. नवीन, डॉ. यशदीप, डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. विशाल बोध, डॉ. नलिन शामिल रहे।

पहले सर्जरी से होता था पैन्क्रियाटाइटिस मरीजों का उपचार
बता दें कि हिमाचल में अब तक पैन्क्रियाटाइटिस मरीजों का उपचार केवल सर्जरी के माध्यम से किया जाता था। जबकि उन्हें ईयूएस सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी तकनीक से उपचार करवाने के लिए प्रदेश के बाहर जाना पडता था। मगर अब मरीजों का उपचार एआईएमएसएस चामियाना में ईयूएस तकनीक से हो पायेगा।

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क्या है ईयूएस सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी
ईयूएस सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसका उपयोग अग्न्याशय के पास विकसित तरल पदार्थ से भरी थैली, जिसे स्यूडोसिस्ट कहते हैं, के इलाज के लिए किया जाता है। इसमें सर्जन पेट और सिस्ट के बीच एक सीधा मार्ग (छिद्र) बनाते हैं, जिससे सिस्ट का द्रव पेट में निकल जाता है और शरीर द्वारा अवशोषित हो जाता है।

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Written by News Ghat

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