Asha Hospital
in

तारिक रहमान : क्यों चर्चा में है निर्वाचन से सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाले तारिक रहमान! राजनीति में मचाई उथल-पुथल

तारिक रहमान : क्यों चर्चा में है निर्वाचन से सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाले तारिक रहमान! राजनीति में मचाई उथल-पुथल

तारिक रहमान : क्यों चर्चा में है निर्वाचन से सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाले तारिक रहमान! राजनीति में मचाई उथल-पुथल

तारिक रहमान : क्यों चर्चा में है निर्वाचन से सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाले तारिक रहमान! राजनीति में मचाई उथल-पुथल

दक्षिण एशिया की राजनीति में वर्तमान में एक नाम बहुत ज्यादा सुर्खियों में पहुंच चुका है और वह है तारिक रहमान। बांग्लादेश की सियासत में लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहे परंतु 2024 में उन्होंने जोरदार वापसी की और वर्तमान में तारिक रहमान ने ग्लोबल परिदृश्य में सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

Shri Ram

तारिक रहमान : क्यों चर्चा में है निर्वाचन से सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाले तारिक रहमान! राजनीति में मचाई उथल-पुथल

आज तारिक बांग्लादेश की राजनीति के उभरते सितारे की तरह चमक रहे हैं। हर तरफ यही सवाल उठा रहा है कि आखिर कौन है तारिक रहमान? कैसे अचानक से बांग्लादेश की राजनीति में इन्होंने उथल-पुथल मचा दी?

Indian Public School

तारिक रहमान को विरासत में मिली राजनीति
तारिक रहमान का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जिसने बांग्लादेश की राजनीति की दिशा तय की। बांग्लादेश पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। बांग्लादेश की राजनीति में इन दोनों का बहुत बड़ा रोल रहा है। जियाउर रहमान ने बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की स्थापना की। तारिक बचपन से ही राजनीतिक माहौल में ही पले-बड़े और उनके स्वभाव में राजनीति और कूटनीति साफ रूप से छलकती है।

Doon valley school

लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई
तारिक रहमान ने 1990 के दशक में राजनीति में कदम रखा BNP को मजबूत करने और युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ने का काम किया। पार्टी का नेटवर्क बढ़ाने के साथ-साथ उन्होंने युवाओं को राजनीति गुण सिखाए। 2001 में जब BNP सत्ता में आई तो तारिक रहमान की पकड़ और भी मजबूत हुई। हालांकि उन पर लगातार भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप भी लगते रहे और यही विवाद उनके जीवन की सबसे बड़ी चुनौती भी बन गए।

2007 में बांग्लादेश छोड़कर जाना पड़ा लंदन
2007 में बांग्लादेश में काफी उथल-पुथल मच गई जिसके चलते तारिक रहमान को देश छोड़कर लंदन जाना पड़ा। हालांकि कहा जाता है कि वह लंदन में इलाज करवाने गए थे लेकिन सूत्रों की माने तो उन्हें कई मामलों में सजा सुनाई गई और वह सजा से बचने के लिए लंदन चले गए थे। निर्वाचन का यह कठिन दौर तारिक रहमान के लिए सबक साबित हुआ। उन्होंने पार्टी से दूरी नहीं बनाई बल्कि विदेश से ही BNP के लिए काम करते रहे और 2024 में जब सत्ता परिवर्तन हुआ तो वह बांग्लादेश वापस आए।

JPERC 2025

क्या अब बांग्लादेश और भारत के रिश्तों को मिलेगी नई दिशा?
बांग्लादेश के चुनावी नतीजे के बाद अब तारिक रहमान के नाम पर मोहर लगती हुई नजर आ रही है। पूरी सम्भावना है कि तारिक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का पद संभालेंगे। इस खबर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तारिक रहमान को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में भारत बांग्लादेश के संबंध बेहतर होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने तारिक रहमान के नेतृत्व में भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय रिश्तो को नई ऊर्जा मिलने की भी उम्मीद जताई है।

निष्कर्ष
बांग्लादेश के चुनावी परिणाम केवल एक स्थानीय राजनीतिक तक सीमित नहीं है। बल्कि यह परिणाम अब दक्षिण एशिया की राजनीति को भी प्रभावित करेंगे। बांग्लादेश में इस तरह का राजनीतिक बदलाव अब पुरानी व्यवस्थाओं को बदलने की नींव रखेगा और इस पूरे क्रम तारिक रहमान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। तारिक रहमान के समर्थक भी यही मान रहे हैं कि उनके नेतृत्व में बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली होगी और राजनीतिक संतुलन बेहतर होगा।

दिन भर की ताजा खबरों के अपडेट के लिए WhatsApp NewsGhat Media के इस लिंक को क्लिक कर चैनल को फ़ॉलो करें।

Written by News Ghat

Our passionate journalist at Newsghat, dedicated to delivering accurate and timely news from Paonta Sahib, Sirmaur, and rural areas. With a focus on community-driven stories, we ensures that every report reaches you with clarity and truth. At Newsghat, it's all about "आपकी बात"!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

PMO का नया दफ्तर ‘सेवा तीर्थ’ : नए ऑफिस में बैठते ही प्रधानमंत्री ने बदल दी किसान, महिलाओं और युवाओं के भविष्य की तस्वीर

PMO का नया दफ्तर ‘सेवा तीर्थ’ : नए ऑफिस में बैठते ही प्रधानमंत्री ने बदल दी किसान, महिलाओं और युवाओं के भविष्य की तस्वीर