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Micro Financing: माइक्रो-फाइनेंस लोन पर RBI ने दी अनुमति, कर्ज में डूबे लोगों को ऐसे मिल सकता है फायदा

Micro Financing: माइक्रो-फाइनेंस लोन पर RBI ने दी अनुमति, कर्ज में डूबे लोगों को ऐसे मिल सकता है फायदा

Micro Financing: माइक्रो-फाइनेंस लोन पर RBI ने दी अनुमति, कर्ज में डूबे लोगों को ऐसे मिल सकता है फायदा

 

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा माइक्रो-फाइनेंस लोन संस्थानों को कर्ज की ब्याज दरें तय करने की अनुमति प्रदान कर दी है| साथ ही बैंक द्वारा कहा गया है कि यह दर बहुत ज्यादा नहीं होनी चाहिए|

माइक्रोफाइनेंस लोन से तात्पर्य 3 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले परिवार को दिए जाने वाले गारंटी-मुक्त कर्ज से है। बता दे कि पहले भारतीय रिजर्व बैंक स्वयं तिमाही के आधार पर ब्याज दरों की घोषणा करता था| लेकिन अब ब्याज दर तय करने का अधिकार माइक्रो-फाइनेंस लोन देने वाले संस्थानों को दिया जा चुका है|

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क्या कहा RBI ने ?

रिजर्व बैंक द्वारा कहा गया है कि सभी नियमित इकाइयों को निदेशक-मंडल की अनुमति वाली एक नीति लागू करनी चाहिए| इस नीति के अंतर्गत माइक्रो-फाइनेंस लोन की कीमत, कवर, ब्याज दरों की अधिकतम सीमा और सभी अन्य शुल्कों के बारे में स्पष्ट जानकारी होगी| नए प्रावधान आने वाली 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगे|

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क्या है शर्तें ?

सभी इकाइयों को एक संभावित कर्जदार के बारे में कीमत-संबंधी जानकारी एक मानकीकृत सरल ‘फैक्टशीट’ के रूप में देनी पड़ेगी| इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा यह भी कहा गया है कि यदि कर्जदार समय से पूर्व ही ऋण चुकाता है तो उस पर किसी प्रकार का कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा|

लेकिन यदि किस्त के समय में कोई देरी होती है तो वह संस्थान ग्राहक पर जुर्माना लगा सकता है लेकिन ध्यान रहे वह भी बकाया राशि पर ही लगाया जाएगा ना कि समूची कर्ज की राशि पर|

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा कहा गया है कि किसी माइक्रो-फाइनेंस लोन को चुकाने के लिए कर्जदार की मासिक आय की अधिकतम 50 प्रतिशत राशि ही पुनर्भुगतान की सीमा तय की जा सकती है| वही ऋण से संबंधित समझौता कर्ज ले रहे व्यक्ति को समझ में आने वाली भाषा में तैयार करने का भी प्रावधान किया गया है|

पुराने दिशा-निर्देशों के अंतर्गत माइक्रो फाइनेंस की योग्यता नहीं रखने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) अपनी कुल परिसंपत्ति के 10% से अधिक सूक्ष्म-वित्त कर्ज नहीं दे सकती थीं। हालांकि वर्तमान में इस सीमा को बढ़ाकर अधिकतम 25% तक कर दिया गया है|

क्या है फायदा ?

आरबीआई के नए दिशानिर्देशों का स्वागत करते हुए माइक्रो-फाइनेंस संस्थानों के संगठन एमएफआईएन के निदेशक आलोक मिश्रा ने कहा है कि इस से ना केवल लोन कारोबार में समान अवसर मिलेंगे बल्कि ज्यादा कर्ज में डूबने और कई कर्ज देने की समस्या से भी निपटने में मदद मिल सकेगी|

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Written by Newsghat Desk

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