55 साल संघर्ष करने वाली हाटी समिति को बैठक से बाहर रखने पर उठे सवाल, केंद्रीय जनजाति आयोग से मांगा जवाब

गिरिपार क्षेत्र की हाटी समुदाय की सबसे पुरानी और पंजीकृत सामाजिक संस्था केंद्रीय हाटी समिति ने केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर की है।
समिति का कहना है कि 10 जून को पीटरहॉफ शिमला में आयोजित आयोग की महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश की विभिन्न जनजातीय संस्थाओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाने के लिए 55 वर्षों तक संघर्ष करने वाली हाटी समिति को न तो बुलाया गया और न ही बैठक की कोई सूचना दी गई।
समिति के पदाधिकारियों ने आयोग को भेजे पत्र में कहा है कि हाटी समुदाय को अगस्त 2023 में अनुसूचित जनजाति का संवैधानिक दर्जा मिला था। इस उपलब्धि के लिए उन्होंने केंद्र सरकार, केंद्रीय जनजाति मंत्रालय और केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का आभार भी व्यक्त किया है। हालांकि उनका कहना है कि दर्जा मिलने के बाद भी समुदाय के लोगों को अब तक इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाया है।


हाटी समिति के अनुसार, जनजातीय दर्जा मिलने के बाद इसके क्रियान्वयन में देरी हुई। बाद में न्यायालय में दायर याचिकाओं और स्थगन आदेश के चलते समुदाय के कई युवाओं और विद्यार्थियों को आरक्षण सहित अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सका। समिति का दावा है कि इस स्थिति से हजारों युवा प्रभावित हुए हैं और कई अभ्यर्थी आयु सीमा पार करने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
समिति का कहना है कि वह इन महत्वपूर्ण मुद्दों को सीधे केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष रखना चाहती थी, लेकिन बैठक में शामिल होने का अवसर नहीं मिला। इसी कारण संस्था ने आयोग से यह जानने की मांग की है कि उसे बैठक में क्यों नहीं बुलाया गया।

साथ ही हाटी समिति ने आयोग से आग्रह किया है कि न्यायालय में मामला लंबित रहने के कारण प्रभावित हुए युवाओं और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। समिति ने उम्मीद जताई है कि आयोग उनके पत्र पर सकारात्मक विचार करते हुए उचित जवाब देगा और समुदाय की समस्याओं के समाधान के लिए पहल करेगा।


