हिमाचल में हेल्थ स्कीम घोटाले की आंच तेज: हिमकेयर के साथ आयुष्मान योजना भी जांच के दायरे में

हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य योजनाओं के दुरुपयोग को लेकर बड़ा खुलासा सामने आ रहा है। विजिलेंस की जांच अब सिर्फ हिमकेयर तक सीमित नहीं रही, बल्कि आयुष्मान योजना को भी जांच के घेरे में ले लिया गया है।
राज्य में चल रही जांच के दौरान यह संकेत मिले हैं कि कुछ निजी अस्पतालों ने नियमों की अनदेखी कर सरकारी योजनाओं का गलत लाभ उठाया। आरोप है कि जिन मरीजों को पहले से आयुष्मान योजना का लाभ मिल रहा था, उनके लिए हिमकेयर कार्ड भी बनाए गए।
इस तरह एक ही मरीज के नाम पर दो अलग-अलग योजनाओं के तहत क्लेम दाखिल किए जाने की आशंका जताई जा रही है। इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।


विजिलेंस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों योजनाओं से जुड़ा रिकॉर्ड तलब किया है। जांच के दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। इनमें मरीजों का पंजीकरण, इलाज का विवरण और क्लेम से जुड़ी जानकारी शामिल है।
सूत्रों के अनुसार कई मामलों में पात्रता की सही जांच किए बिना ही लाभ दिखाया गया। इससे वित्तीय अनियमितताओं की संभावना और मजबूत हो गई है।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस पूरे मामले की जांच तीन महीने के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
वहीं, नियमों का उल्लंघन साबित होने पर संबंधित निजी अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। इसमें भारी जुर्माना, अस्पताल का पंजीकरण रद्द करना और जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है।
जांच एजेंसियां अब अस्पतालों के प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ शुरू करने जा रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। ऐसे में यह जांच न केवल घोटाले की सच्चाई सामने लाएगी, बल्कि सिस्टम में सुधार की दिशा भी तय कर सकती है।

