LPG Crisis: हिमाचल में कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत! लौट आया पारंपरिक चूल्हे का दौर, लकड़ी की आग पर पक रहा खाना

LPG Crisis: हिमाचल प्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति तो नियमित की जा रही है मगर कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत लगातार बनी हुई है।

LPG Crisis: हिमाचल में कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत! लौट आया पारंपरिक चूल्हे का दौर, लकड़ी की आग पर पक रहा खाना
यही कारण है कि राज्य में अब तक कई होटल, रेस्टोरेंट और ढाबे बंद हो चुके हैं, जिससे संचालकों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। LPG की कमी के कारण कई जगह लकड़ी के चूल्हों पर भोजन बनाया जा रहा है।

पारंपरिक चूल्हे पर बन रहा खाना
कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी कमी के कारण पारंपरिक चूल्हे (जमीन खोदकर बना चूल्हा) का दौर फिर लौट आया है। होटलों और ढाबों में लकड़ी की आग पर खाना पकाया जा रहा है, जिससे ईंधन संकट के बीच काम जारी है।


गैस की कमी और ऊंची कीमतों के कारण, होटल और ढाबा व्यवसायी लकड़ी की आग का इस्तेमाल कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के बजट सत्र के दौरान भी विधानसभा में CM, मंत्रियों और विधायकों के लिए भोजन लकड़ी के चूल्हों पर पकाया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) द्वारा की गई यह व्यवस्था, ईंधन संकट के कारण रोजाना सैकड़ों लोगों के लिए भोजन सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गई है।


HPTDC के कुक धनी राम के अनुसार, बजट सत्र के दौरान बड़ी संख्या में जन-प्रतिनिधियों के अलावा अधिकारी, पत्रकार, विधानसभा स्टाफ और अन्य आगंतुक भी भोजन करते हैं।
ऐसे में रोजाना सैकड़ों लोगों के लिए भोजन तैयार करना होता है, लेकिन कॉमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। ऐसे में मजबूरी में लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है।
होटलों में खाना बनाने के लिए चूल्हे का इस्तेमाल
विधानसभा ही नहीं पीटरहॉफ, चायल और कसौली सहित अन्य HPTDC के होटलों में भी खाना बनाने के लिए लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि चाय, दूध सहित अन्य छोटी चीजों के लिए व्यवसायिक इंडक्शन का प्रयोग किया जा रहा है।

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