Himachal News: फिर बढ़ेगा हिमाचल पर कर्ज का बोझ! सरकार 5 अगस्त को लेगी 700 करोड़ का नया लोन

शिमला: आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही हिमाचल प्रदेश सरकार एक बार फिर बाजार से 700 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। यह राशि 5 अगस्त को सरकार के खाते में आएगी। सरकार का कहना है कि यह कदम नियमित वित्तीय जरूरतों और जरूरी भुगतान को समय पर पूरा करने के लिए उठाया जा रहा है। नए कर्ज के बाद प्रदेश पर कुल देनदारियों का आंकड़ा 1.12 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक पहुंचने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार, यह ऋण दो अलग-अलग अवधियों के लिए लिया जाएगा। इसमें 400 करोड़ रुपये का कर्ज 18 वर्ष की अवधि के लिए होगा, जबकि 300 करोड़ रुपये का कर्ज 23 वर्ष के लिए लिया जाएगा। दोनों ऋण निर्धारित समय सीमा पूरी होने पर ब्याज सहित वापस चुकाने होंगे।
प्रदेश सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती हर महीने होने वाले अनिवार्य खर्च हैं। सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, पहले से लिए गए कर्ज की किस्तों और ब्याज का भुगतान करने के लिए हर माह बड़ी राशि की आवश्यकता पड़ती है। इन्हीं वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए सरकार को समय-समय पर नया कर्ज लेना पड़ रहा है।


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कर्मचारियों के वेतन पर हर महीने लगभग 2000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। वहीं, पेंशन के भुगतान के लिए करीब 800 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा पुराने कर्ज पर ब्याज चुकाने के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये और मूलधन की अदायगी के लिए करीब 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रबंध करना पड़ता है।
इस तरह सरकार को हर महीने हजारों करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी पड़ती है। हालांकि, राज्य की आय सीमित होने के कारण खर्च और आय के बीच का अंतर लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि सरकार को वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार से ऋण लेना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजस्व बढ़ाने के नए स्रोत विकसित नहीं किए गए तो आने वाले समय में सरकार की वित्तीय चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि विकास कार्यों, कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और अन्य आवश्यक भुगतान में किसी तरह की रुकावट न आए, इसलिए वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था करना जरूरी है।
फिलहाल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले महीनों में सरकार की आय बढ़ाने, खर्चों में संतुलन बनाने और कर्ज पर निर्भरता कम करने की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर रहेगी।


