हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कुल्लू दशहरा में बिना निमंत्रण वाले देवताओं को नहीं मिलेंगी सरकारी सुविधाएं
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं को निमंत्रण देने और उन्हें विशेष सुविधाएं उपलब्ध करवाने के मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने देवता बंशीरा महाराज सिधवां की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी है। याचिका में उत्सव के दौरान विशेष निमंत्रण और सरकारी सुविधाएं देने की मांग की गई थी।
घरेलू देवता को विशेष सुविधाओं का अधिकार नहीं
न्यायाधीश संदीप शर्मा की पीठ ने स्पष्ट किया कि हर स्थानीय या व्यक्तिगत देवता को कुल्लू दशहरा उत्सव में विशेष निमंत्रण और सरकारी सुविधाएं पाने का कानूनी अधिकार नहीं है। अदालत ने कुल्लू के उपायुक्त की ओर से 10 जनवरी, 2025 को जारी आदेश को सही ठहराया।

अदालत के अनुसार, उत्सव में रहने, टेंट और बैठने जैसी सुविधाएं उन्हीं देवताओं को दी जाती हैं, जिन्हें प्रशासन की निर्धारित व्यवस्था के तहत आमंत्रित किया जाता है।
राजस्व रिकॉर्ड में नहीं मिला उल्लेख

मामले की सुनवाई के दौरान सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 1990 में आपसी मतभेद के कारण बंशीरा महाराज से अलग होकर नया देवता बनाया गया था। मूल देवता का रथ वर्ष 2007 से कुल्लू दशहरा उत्सव में शामिल होता रहा है, जबकि याचिकाकर्ता देवता का रथ बाद में कुछ समर्थकों ने तैयार किया था।
अदालत ने पाया कि राजस्व रिकॉर्ड में भी इस नए देवता के पुराने इतिहास या अस्तित्व का उल्लेख नहीं है। इसी आधार पर उसे विशेष सुविधाएं देने की मांग स्वीकार नहीं की गई।
नेहरू पार्क में रुक सकेंगे बिना बुलाए देवता
हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और दशहरा उत्सव समिति की दलील स्वीकार की कि उत्सव में सीमित जगह और बजट के कारण सभी देवताओं के लिए विशेष व्यवस्था करना संभव नहीं है।
प्रशासन ने बिना निमंत्रण आने वाले देवताओं के लिए नेहरू पार्क में स्थान निर्धारित किया है। वे वहां ठहर सकते हैं, लेकिन मुख्य मैदान में जगह, टेंट या गद्दे जैसी सरकारी सुविधाओं की मांग नहीं कर सकते।
कारदार संघ के पास रहेगा अधिकार
अदालत ने स्पष्ट किया कि भविष्य में किन नए देवताओं को उत्सव में आमंत्रित करना है, इस संबंध में सिफारिश करने का अधिकार कुल्लू जिला देवता कारदार संघ के पास रहेगा। इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

