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पांवटा साहिब : “न पैसे का दम, न प्रचार का शोर… पत्रकार जयप्रकाश तोमर ने ऐसे जीता बीडीसी चुनाव”

पांवटा साहिब : “न पैसे का दम, न प्रचार का शोर… पत्रकार जयप्रकाश तोमर ने ऐसे जीता बीडीसी चुनाव”

पांवटा साहिब : “न पैसे का दम, न प्रचार का शोर… पत्रकार जयप्रकाश तोमर ने ऐसे जीता बीडीसी चुनाव”

पांवटा साहिब : “न पैसे का दम, न प्रचार का शोर… पत्रकार जयप्रकाश तोमर ने ऐसे जीता बीडीसी चुनाव”

TROWS

पांवटा साहिब : पंचायत चुनावों में अक्सर धनबल और दिखावे की चर्चा होती है। लेकिन सिरमौर के वार्ड नंबर-4 बढ़ाना से एक ऐसा परिणाम सामने आया है, जिसने लोगों का ध्यान खींचा है। युवा पत्रकार जयप्रकाश तोमर ने सादगी और जनसंपर्क के दम पर बीडीसी चुनाव जीत लिया।

जयप्रकाश तोमर ने चुनाव प्रचार के दौरान बड़े-बड़े काफिलों या महंगे आयोजनों का सहारा नहीं लिया। उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ घर-घर जाकर लोगों से संपर्क किया। उनके साथ केवल कुछ करीबी सहयोगी ही प्रचार में शामिल रहे।

चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने मतदाताओं के सामने विकास और जनहित के मुद्दे रखे। उनका कहना था कि क्षेत्र का विकास किसी भोज या शराब वितरण से नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि की सोच और कार्यशैली से तय होता है।

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इस बार जिला सिरमौर में छह पत्रकार चुनाव मैदान में उतरे थे। इनमें जीत हासिल करने वाले एकमात्र पत्रकार जयप्रकाश तोमर रहे। उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला भी मतदान से करीब 15 दिन पहले लिया था।

कम समय और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने लगातार जनसंपर्क बनाए रखा। चुनाव के दौरान उनके खिलाफ कई तरह की चर्चाएं और अफवाहें भी फैलाई गईं। गांव और जाति के आधार पर माहौल बनाने की कोशिशें भी हुईं।

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इसके बावजूद उन्होंने विवादों से दूरी बनाए रखी। उन्होंने अपना पूरा ध्यान सीधे जनता तक पहुंचने पर केंद्रित रखा। यही रणनीति उनके लिए फायदेमंद साबित हुई।

करीब दस वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय जयप्रकाश तोमर क्षेत्र की समस्याओं को लगातार उठाते रहे हैं। लोगों के बीच उनकी पहचान एक सक्रिय और जमीनी पत्रकार के रूप में रही है। चुनाव में इसी भरोसे का असर भी दिखाई दिया।

मतगणना के बाद घोषित परिणामों में उन्होंने 73 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। परिणाम सामने आते ही समर्थकों में उत्साह का माहौल बन गया।

घर वापसी के दौरान कई किलोमीटर पहले ही लोग उनके स्वागत के लिए सड़कों पर उतर आए। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने उनका अभिनंदन किया। कई स्थानों पर भावुक दृश्य भी देखने को मिले।

राजनीतिक जानकार इस जीत को सकारात्मक राजनीति और जनविश्वास की जीत मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह परिणाम बताता है कि जनता आज भी काम, पहुंच और विश्वसनीयता को महत्व देती है।

कलाथा-किलोड़ गांव के निवासी जयप्रकाश तोमर पिछले एक दशक से पत्रकारिता से जुड़े हैं। उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर (गढ़वाल) से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह ईटीवी भारत में जिला सिरमौर स्टिंगर के रूप में कार्यरत हैं और एक डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म का भी संचालन कर रहे हैं।

Written by Newsghat Desk

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