AI और नई शिक्षा नीति पर शिक्षकों का मंथन, रोज़ ऑर्किड वर्ल्ड स्कूल में जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित

पांवटा साहिब: द रोज़ ऑर्किड वर्ल्ड स्कूल में शनिवार को कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विषय पर जिला स्तरीय DLD कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCFSE 2023) के अनुरूप कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना था।
इस एक दिवसीय कार्यशाला में जिले के करीब 40 शिक्षकों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए CT और AI को कक्षा शिक्षण में शामिल करने से जुड़े कुल 12 केस पेपर प्रस्तुत किए। कार्यशाला का मुख्य विषय “वास्तविक जीवन में AI” रखा गया था।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने बताया कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि, शिक्षा, परिवहन और रोजमर्रा के कई कार्यों में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि छात्रों को केवल तकनीक का उपयोग ही नहीं, बल्कि उसका जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ इस्तेमाल करना भी सिखाया जाना चाहिए।


अंतिम सत्र में सभी प्रस्तुत किए गए केस पेपर का विशेषज्ञ समिति ने मूल्यांकन किया। प्रस्तुतियों को विषय की समझ, नवीन सोच, कक्षा में उपयोगिता और प्रस्तुति शैली जैसे विभिन्न मानकों के आधार पर परखा गया। इसके बाद तीन सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों का चयन किया गया।
मूल्यांकन समिति में जीएसएसएस पुरूवाला के कंप्यूटर साइंस व्याख्याता विशाल कुमार, द रोज़ ऑर्किड वर्ल्ड स्कूल की प्रधानाचार्या ममता सैनी और विद्यालय की एकेडमिक्स निदेशिका अंजू अरोड़ा शामिल रहीं। समिति ने सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे नवाचार आधारित कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता बताई।

प्रतियोगिता में शानू सूद ने प्रथम, भारती चौहान ने द्वितीय और अंजू चौहान ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को सम्मानित भी किया गया।
विद्यालय के निदेशक ललित शर्मा ने कहा कि बदलते समय में CT और AI जैसे विषय विद्यार्थियों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। वहीं प्रधानाचार्या ममता सैनी ने सभी शिक्षकों, प्रतिभागियों और आयोजन टीम का सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालय आगे भी इस तरह की शैक्षणिक कार्यशालाओं का आयोजन करता रहेगा, ताकि शिक्षक और विद्यार्थी नई तकनीकों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ सकें।

