बेटियों के हक पर हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पैतृक संपत्ति को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत बेटी को भी पैतृक संपत्ति में बेटे के बराबर अधिकार मिलता है।
यह मामला ऊना जिले से जुड़ा है। करतार चंद की बिना वसीयत के मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति को लेकर विवाद खड़ा हुआ। आरोप था कि उनके बेटे रोशन लाल ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से जमीन का इंतकाल अपने नाम करवा लिया।
मामले में अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि हिंदू उत्तराधिकार संशोधन अधिनियम, 2005 भविष्य में होने वाले मामलों पर लागू होता है। इसलिए बेटियों को पैतृक संपत्ति में हिस्सा देने का दावा सही नहीं है।


हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। न्यायाधीश राकेश कैंथला ने कहा कि बेटी को भी बेटे की तरह जन्म से ही पैतृक संपत्ति में बराबर का अधिकार प्राप्त होता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 9 सितंबर 2005 को हिंदू उत्तराधिकार कानून में हुए संशोधन का लाभ लेने के लिए यह जरूरी नहीं है कि उस समय पिता जीवित हों। यानी पिता की मृत्यु पहले हो चुकी होने के बावजूद बेटी अपने कानूनी अधिकार का दावा कर सकती है, यदि मामला कानून की शर्तों के अंतर्गत आता है।

हाईकोर्ट ने इस आधार पर अपील को खारिज कर दिया। इस फैसले को बेटियों के संपत्ति संबंधी अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फैसले का संदेश साफ है कि पैतृक संपत्ति में बेटी और बेटे के अधिकार को केवल लिंग के आधार पर अलग नहीं किया जा सकता। कानून बेटियों को भी समान उत्तराधिकार अधिकार प्रदान करता है।


