हिमाचल में बढ़ा स्क्रब टायफस का खतरा, शोध में मिले 15 नए परजीवी

शिमला: हिमाचल प्रदेश में स्क्रब टायफस को लेकर चिंता बढ़ाने वाली जानकारी सामने आई है। हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक अध्ययन में राज्य के कई जिलों में इस बीमारी से जुड़े नए परजीवियों की पहचान की गई है। शोध के दौरान 15 नई चिगर माइट प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें से एक प्रजाति भारत में पहली बार पाई गई है।
अध्ययन के अनुसार शिमला, सोलन, बिलासपुर, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और ऊना समेत आठ जिलों में छोटे स्तनधारी जीवों की जांच की गई। वैज्ञानिकों ने चूहों और छछूंदरों जैसे 96 जीवों के नमूने एकत्र किए। जांच में करीब 38 प्रतिशत नमूनों में स्क्रब टायफस फैलाने वाले जीवाणु की मौजूदगी पाई गई, जो राज्य में संक्रमण के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है।
शोध के दौरान 1000 से अधिक बाहरी परजीवियों का भी अध्ययन किया गया। इनमें बड़ी संख्या चिगर माइट्स की थी, जो स्क्रब टायफस के संक्रमण को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नई प्रजातियों की पहचान भविष्य में बीमारी की रोकथाम और नियंत्रण रणनीति तैयार करने में मददगार साबित होगी।


विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन, भूमि उपयोग में बदलाव और जंगलों व मानव बस्तियों के बीच बढ़ते संपर्क को संक्रमण फैलने का प्रमुख कारण बताया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी निगरानी और नियंत्रण उपाय नहीं अपनाए गए तो आने वाले वर्षों में यह बीमारी और गंभीर रूप ले सकती है।
हिमाचल प्रदेश में हर साल स्क्रब टायफस के कारण कई लोगों की जान जाती है। स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और जिलों में आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडार उपलब्ध कराया गया है। जरूरत पड़ने पर अस्पतालों में विशेष वार्ड भी बनाए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों ने मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य को एक साथ जोड़कर काम करने वाले “वन हेल्थ” मॉडल को अपनाने की सिफारिश की है, ताकि इस तरह की बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।


