हिमाचल में भांग की खेती को मिल सकती है मंजूरी! बिना लाइसेंस नहीं कर सकेंगे खेती, जानिए सरकार की बड़ी तैयारी

शिमला: हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक और औषधीय उपयोग के लिए भांग की नियंत्रित खेती शुरू करने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। प्रदेश सरकार और कृषि विभाग इस योजना के लिए जरूरी नियमों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार इसकी आधिकारिक घोषणा कर सकती है।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, भांग की खेती करने, बीज उपलब्ध कराने और उससे जुड़े उत्पादों का निर्माण करने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। बिना लाइसेंस किसी भी व्यक्ति या संस्था को इस कार्य की अनुमति नहीं मिलेगी। लाइसेंस जारी करने के साथ निर्धारित शुल्क भी लिया जाएगा।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, बीज आपूर्ति के लिए लाइसेंस शुल्क करीब 25 हजार रुपये, खेती के लिए लगभग 3 लाख रुपये और प्रोसेसिंग, दवा या अन्य उत्पाद बनाने वाली इकाइयों के लिए शुल्क 2 करोड़ रुपये तक रखा जा सकता है। हालांकि अंतिम राशि सरकार की मंजूरी के बाद ही तय होगी।


सरकार की योजना के अनुसार, भांग की खेती कम से कम तीन एकड़ भूमि पर ही की जा सकेगी। जिन किसानों के पास पर्याप्त जमीन नहीं है, वे लीज पर भूमि लेकर भी खेती कर सकेंगे। इससे कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ने और नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
योजना में बीजों को लेकर भी सख्त नियम प्रस्तावित किए गए हैं। किसी भी किसान या संस्था को दूसरे राज्यों या विदेशों से बीज लाने की अनुमति नहीं होगी। सरकार द्वारा तय व्यवस्था के तहत ही प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि खेती पूरी तरह नियंत्रित और पारदर्शी तरीके से हो सके।

सूत्रों के अनुसार, सरकार आगामी मंत्रिमंडल की बैठक या फिर 15 अगस्त के आसपास इस योजना का औपचारिक ऐलान कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो हिमाचल उन राज्यों में शामिल होगा, जहां नियंत्रित नियमों के तहत भांग की खेती की अनुमति होगी।
सरकार का मानना है कि इस पहल से औषधीय और औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही किसानों के लिए आय के नए स्रोत खुलेंगे और युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिल सकते हैं। योजना लागू होने के बाद खेती से लेकर उत्पादन और प्रोसेसिंग तक सभी गतिविधियां तय नियमों और सरकारी निगरानी में संचालित की जाएंगी।

