हिमाचल में डिजिटल क्रांति: राजस्व विभाग में लंबित जमाबंदियों में 90% की गिरावट, 6,500 से घटकर 750 रह गए मामले
हिमाचल प्रदेश में राजस्व विभाग ने भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने और सरकारी कामकाज में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। प्रदेश सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, तकनीक के इस्तेमाल से लंबे समय से लंबित जमाबंदियों की संख्या में करीब 90 प्रतिशत की कमी आई है। पहले जहां लगभग 6,500 जमाबंदियां लंबित थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर करीब 750 रह गई है।
रविवार को जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि यह कमी पिछले पांच वर्षों के दौरान जमीन से जुड़े लेन-देन के रिकॉर्ड को अपडेट करने के कारण संभव हुई है। इस दौरान करीब 5,750 जमाबंदियों को अपडेट किया गया है। इससे भूमि रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और लोगों को राजस्व संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिली है।
सरकार के अनुसार, पिछले चार वर्षों में राजस्व विभाग ने अपने कामकाज को आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, राजस्व अदालतों की ऑनलाइन प्रक्रिया और जमीन से जुड़े जरूरी दस्तावेजों को आम लोगों तक आसानी से पहुंचाना शामिल है।

विभाग ने इसके लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शुरू किए हैं। इनमें ई-हिमभूमि, राजस्व प्रबंधन प्रणाली (RMS), आरसीसीएमएस, भू-नक्शा पोर्टल और ‘माई डीड’ पोर्टल प्रमुख हैं। इन माध्यमों से भूमि रिकॉर्ड देखने, दस्तावेजों तक पहुंच बनाने और राजस्व से जुड़े कार्यों को ऑनलाइन तरीके से पूरा करने की सुविधा मिल रही है।
डिजिटल व्यवस्था लागू होने से लोगों को जमीन से जुड़े रिकॉर्ड के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो रही है। साथ ही, रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया में भी तेजी आई है।

सरकार का कहना है कि राजस्व विभाग में तकनीक का इस्तेमाल करने का मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाना है। लंबित जमाबंदियों की संख्या में आई कमी को इसी दिशा में हुई प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।



