पांवटा साहिब उपप्रधान संघ में घमासान, 15 की मौजूदगी में कार्यकारिणी बनाने पर उठे सवाल

पांवटा साहिब: उपप्रधान संघ की बैठक को लेकर क्षेत्र के कई उपप्रधानों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि संघ के मामलों में किसी बाहरी व्यक्ति का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा और संगठन से जुड़े फैसले सभी उपप्रधानों की सहमति से होने चाहिए।
उपप्रधानों के अनुसार क्षेत्र में कुल 49 उपप्रधान हैं, लेकिन बैठक से पहले अधिकांश को फोन के माध्यम से कोई सूचना नहीं दी गई। बैठक में केवल 15 उपप्रधान ही पहुंचे। कुछ उपस्थित उपप्रधानों ने भी आरोप लगाया कि उन्हें बैठक में बुलाने के लिए सही जानकारी नहीं दी गई।
उपप्रधानों का कहना है कि सीमित संख्या में हुई बैठक के आधार पर कार्यकारिणी का गठन करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। उनका तर्क है कि किसी बैठक में किसी उपप्रधान की मौजूदगी को कार्यकारिणी के गठन के लिए उसकी सहमति नहीं माना जा सकता।


उन्होंने कहा कि संघ किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव में नहीं, बल्कि सभी उपप्रधानों की सामूहिक राय और क्षेत्र की जनता के हितों के आधार पर चलना चाहिए। सभी उपप्रधान जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं और उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी अपने क्षेत्रों की समस्याओं को उठाकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है।
उपप्रधानों ने स्पष्ट किया कि वे अपने स्तर पर जनता की समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों को संबंधित विभागों के सामने रखने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि संघ के किसी भी निर्णय में बाहरी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

उन्होंने मांग की कि संघ से संबंधित भविष्य के सभी फैसले पर्याप्त सूचना देकर, सभी उपप्रधानों को विश्वास में लेकर और बहुमत की राय के आधार पर किए जाएं। उनका कहना है कि बिना व्यापक सहमति के बनाई गई कार्यकारिणी को सर्वसम्मत कार्यकारिणी नहीं माना जा सकता।
संयुक्त बयान जारी करने वालों में हितेन्द्र चौधरी, धर्मेंद्र कुमार, अरविंद कश्यप, गुरुचरण सिंह, अविनाश झाबा, गुरमेल सिंह, सुनील परमार, धर्मेंद्र सिंह, सुनील कुमार, गुलशेर, बलदेव सिंह, संदीप कुमार, हरि सिंह, अमनदीप, अनिल कुमार, याहिया खान और साधु राम सहित अन्य उपप्रधान शामिल रहे।

