घर की चारदीवारी से हुनर के मंच तक पहुंचीं पांवटा साहिब की महिलाएं! ऐसे बन रही आत्मनिर्भर

पांवटा साहिब। कभी घर के कामकाज तक सीमित रहने वाली कई महिलाएं अब अपने हुनर को पहचान दिलाने के साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत भारतीय वन्यजीव संस्थान की पहल से महिलाओं को अपने कौशल को निखारने और उत्पाद तैयार करने का अवसर मिल रहा है।
इस पहल से जुड़ी महिलाएं पारंपरिक हुनर का इस्तेमाल कर कई तरह की उपयोगी और आकर्षक चीजें तैयार कर रही हैं। इनमें राखियां, मफलर, मोबाइल कवर, सामान रखने के पैक, घर में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं और सजावटी सामान शामिल हैं।
राखी के सीजन में महिलाओं द्वारा तैयार की गई राखियां खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इन उत्पादों में स्थानीय कला और महिलाओं की रचनात्मकता की झलक दिखाई देती है। इससे महिलाओं को अपने हुनर को आगे बढ़ाने के साथ रोजगार की संभावनाएं भी तलाशने का मौका मिल रहा है।


महिलाओं का कहना है कि पहले उनका अधिकतर समय घर के कामों और खाली समय में मोबाइल या टीवी देखने में बीतता था। अब वे घर से बाहर निकलकर नई चीजें सीख रही हैं और अपने हाथों से उत्पाद तैयार कर रही हैं।
भारतीय वन्यजीव संस्थान की इस पहल का उद्देश्य केवल सामान तैयार करवाना नहीं, बल्कि महिलाओं को उनके हुनर की पहचान दिलाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाना भी है। प्रशिक्षण और बेहतर बाजार मिलने पर महिलाएं अपने उत्पादों को बड़े स्तर तक पहुंचा सकती हैं।

इस पहल से जुड़ी महिलाओं को उम्मीद है कि उनके बनाए सामान को स्थानीय बाजार के साथ दूसरे क्षेत्रों में भी पहचान मिलेगी। इससे उन्हें आमदनी के नए अवसर मिल सकते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।

महिलाओं के अनुसार, हुनर को सही मंच और बाजार मिले तो घरेलू स्तर पर किया जाने वाला काम भी रोजगार का जरिया बन सकता है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत चल रही यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में सामने आई है।

