प्लास्टिक कचरे से गणित सिखाने का अनोखा प्रयोग, पांवटा साहिब के बीईईओ रामपाल को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान

पांवटा साहिब: शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नए प्रयोग करने वाले शिक्षा खंड माजरा के खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (बीईईओ) रामपाल को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान 2 और 3 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में दिया जाएगा।
रामपाल का चयन प्लास्टिक वेस्ट के रचनात्मक इस्तेमाल से गणितीय साइन बोर्ड और अलग-अलग गणितीय चिह्न तैयार करने के नवाचार के लिए हुआ है। खास बात यह है कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा निदेशालय की ओर से राष्ट्रीय सम्मान के लिए 10 नाम भेजे गए थे। इनमें रामपाल एकमात्र बीईईओ हैं, जिनका चयन हुआ है।
इस सम्मान के लिए चयन प्रक्रिया अगस्त 2025 में शुरू हुई थी। सबसे पहले ऑनलाइन आवेदन के साथ 40 सवालों के जवाब और बायोडाटा भेजा गया। इसके बाद दिसंबर 2025 में अपने नवाचार पर 10 से 12 पन्नों की प्रस्तुति तैयार की गई।


अगले चरण में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तस्वीरों के साथ पूरे कार्य की जानकारी विशेषज्ञों के सामने रखी गई। इस प्रक्रिया के बाद रामपाल के नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के लिए चुना गया।
रामपाल ने प्लास्टिक कचरे का उपयोग करके गणित से जुड़े साइन बोर्ड और विभिन्न चिह्न तैयार किए। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को गणितीय अवधारणाएं आसानी से समझाना है। साथ ही इस पहल के जरिए बेकार प्लास्टिक को दोबारा उपयोग में लाने और पर्यावरण बचाने का संदेश भी दिया गया।

रामपाल ने अपनी सफलता का श्रेय जिला सिरमौर के उप शिक्षा निदेशक प्रारंभिक राजीव ठाकुर के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने शिक्षा खंड कार्यालय माजरा के अधीक्षक रमनदीप, क्लर्क पंकज शर्मा और क्लर्क योगेश कुमार का भी सहयोग के लिए आभार जताया।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके व्यक्तिगत प्रयास से आगे बढ़कर शिक्षा में नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों की पहचान है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सम्मान उन्हें विद्यार्थियों के लिए भविष्य में और बेहतर प्रयोग करने के लिए प्रेरित करेगा।


