नागपुर से श्री रेणुका जी पहुंचा बाघों का जोड़ा, अब गूंजेगी रॉयल बंगाल टाइगर की दहाड़

सिरमौर। श्री रेणुका जी की वन्यजीव सफारी में अब रॉयल बंगाल टाइगर की दहाड़ सुनाई देगी। नागपुर के बालासाहेब ठाकरे गोरेवाड़ा अंतरराष्ट्रीय प्राणी उद्यान से बाघों का एक जोड़ा रविवार को श्री रेणुका जी पहुंच गया। इनमें मादा बाघ की उम्र करीब 3 वर्ष और नर बाघ की उम्र 5 वर्ष है। यह हिमाचल प्रदेश के इस चिड़ियाघर के लिए रॉयल बंगाल टाइगर का पहला जोड़ा है।
दोनों बाघ शुक्रवार शाम नागपुर से रवाना हुए थे। करीब 1900 किलोमीटर का सफर तय कर वे मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा होते हुए हिमाचल पहुंचे। वन्य प्राणी विंग शिमला डिवीजन के डीएफओ डॉ. शाहनवाज अहमद के नेतृत्व में 8 सदस्यीय टीम पूरे सफर के दौरान बाघों के साथ रही।
बाघों को लाने के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था की गई थी। शेड्यूल-वन वन्यजीव होने के कारण नेशनल जू अथॉरिटी के नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया। सफर के दौरान बाघों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी गई।


रेणुका जी में दोनों बाघों के लिए करीब 1.67 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक एनक्लोजर तैयार किया गया है। करीब 4500 वर्ग मीटर क्षेत्र में बने इस परिसर में खुले स्थान के साथ नाइट शेल्टर, नर्सिंग और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
बाघों को लाने की प्रक्रिया पिछले कई वर्षों से चल रही थी। इसके लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की आवश्यक मंजूरी ली गई। इस आदान-प्रदान के तहत नागपुर प्राणी उद्यान को रेड जंगल फाउल का एक जोड़ा दिया गया है।

रेणुका सफारी में पहले शेर भी आकर्षण का केंद्र रहे हैं। वर्ष 1975 में यहां शेरों का जोड़ा लाया गया था और एक समय इनकी संख्या करीब 29 तक पहुंच गई थी। वर्ष 2015 में आखिरी शेर की मौत के बाद यहां शेरों की मौजूदगी खत्म हो गई।
अब रॉयल बंगाल टाइगर के आने से रेणुका सफारी को नया आकर्षण मिलने की उम्मीद है। सिरमौर के सिम्बलबाड़ा और पांवटा साहिब क्षेत्र में भी पहले जंगली बाघों की मौजूदगी कैमरा ट्रैप में दर्ज हो चुकी है।


