हिमाचल में धोखाधड़ी: सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 2.37 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप, पूर्व सैनिक ने SP से लगाई गुहार
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 2 करोड़ 37 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। सुजानपुर तहसील के बैरी निवासी दिव्यांग भूतपूर्व सैनिक सतीश कुमार ने इस संबंध में एसपी बलबीर सिंह ठाकुर को शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने अपने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की है।
सतीश कुमार ने हमीरपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि भारतीय सेना में सेवा करते हुए उन्होंने अपनी एक टांग गंवा दी थी। इसके बाद वह अपने बेटे को सरकारी नौकरी दिलाना चाहते थे। इसी सिलसिले में उन्होंने कुछ लोगों पर भरोसा किया। उनका आरोप है कि इन लोगों ने सैन्य इंजीनियरिंग सेवा, सैन्य प्रतिष्ठानों, रेलवे और अन्य सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया था।
तीन व्यक्तियों से जुड़े लेन-देन का लगाया आरोप

शिकायत के अनुसार, महाराष्ट्र निवासी राहुल किशोर गायकवाड़ से करीब 45 लाख रुपये, कांगड़ा निवासी रवि कुमार चनौर से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये और पठानकोट निवासी तिलक राज से करीब 42 लाख रुपये के लेन-देन का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन सभी राशियों को मिलाकर कुल रकम लगभग 2.37 करोड़ रुपये बनती है।
हालांकि, शिकायतकर्ता ने भी बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद ही कुल राशि का सही निर्धारण करने की मांग की है।

फर्जी नियुक्ति पत्र भेजने और धमकियां देने के आरोप
सतीश कुमार का आरोप है कि उन्हें अलग-अलग समय पर नियुक्ति पत्र भेजे गए, जिनकी सत्यता पर संदेह है। उन्होंने कथित फर्जी नियुक्ति पत्रों, ऋण संबंधी दस्तावेजों, चेक और मोबाइल संदेशों की जांच करवाने की मांग की है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पैसे वापस मांगने पर उन्हें धमकियां दी गईं। उन्होंने पुलिस से संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच करने, बैंक खातों में हुए लेन-देन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का सत्यापन करने तथा मामले में अन्य संभावित पीड़ितों के बयान दर्ज करने की अपील की है।
पुलिस कर रही मामले की जांच
एसपी बलबीर सिंह ठाकुर ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है।
फिलहाल, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई का इंतजार है।



