पांवटा सिविल अस्पताल की जांच पर उठे सवाल, 90 वर्षीय मरीज को लेकर जिला प्रशासन (SDM)से निष्पक्ष जांच की मांग…

पांवटा साहिब: सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में 90 वर्षीय मरीज श्रीमती मुंगा देवी से जुड़ा मामला अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। मरीज के परिजनों और तीमारदारों ने अस्पताल में चल रही जांच को लेकर निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल स्तर पर गठित जांच समिति की भूमिका को लेकर उन्हें कुछ आशंकाएं हैं। उनका आरोप है कि संबंधित स्टाफ नर्स को बचाने का प्रयास किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इसे जांच के बिना तथ्य नहीं मानते, लेकिन निष्पक्ष जांच के लिए अस्पताल प्रशासन से अलग व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
परिजनों ने मांग की है कि मामले की जांच एसडीएम पांवटा साहिब की निगरानी में या किसी स्वतंत्र सक्षम अधिकारी से करवाई जाए। उनका कहना है कि संबंधित स्टाफ नर्स के खिलाफ पहले भी शिकायतें होने की जानकारी उन्हें मिली है। ऐसे में इस मामले की जांच भी पूरी पारदर्शिता के साथ होना जरूरी है।


90 वर्षीय मरीज की हालत को लेकर चिंता
परिजनों ने 90 वर्षीय मुंगा देवी की चिकित्सा स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि मरीज का ऑक्सीजन स्तर करीब 74 से 77 प्रतिशत तक दर्ज किया गया था। इसके बावजूद मरीज को डिस्चार्ज किए जाने की बात सामने आई।

परिजनों ने चिकित्सकीय निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे डॉक्टर नहीं हैं और चिकित्सा संबंधी फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते। लेकिन मरीज की उम्र और ऑक्सीजन स्तर को देखते हुए डिस्चार्ज से पहले वरिष्ठ चिकित्सक से उसकी स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन करवाया जाना चाहिए।
परिजनों ने यह भी मांग की है कि यदि पांवटा अस्पताल में आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो मरीज को उसकी स्थिति के अनुसार किसी बड़े चिकित्सा संस्थान, जैसे PGIMER/GMCH चंडीगढ़ या अन्य उपयुक्त केंद्र में रेफर करने पर विचार किया जाए।
रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
शिकायत में घटना से संबंधित CCTV फुटेज, ड्यूटी रोस्टर, ऑक्सीजन सप्लाई और सिलेंडर रिकॉर्ड, नर्सिंग रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेज और मरीज के vital monitoring रिकॉर्ड जांच के लिए सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
इसके अलावा घटना के समय मौजूद परिजनों, मरीजों, तीमारदारों और अन्य गवाहों के बयान दर्ज करने की मांग भी की गई है।
परिजनों ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि शिकायतकर्ताओं और गवाहों पर किसी तरह का दबाव न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और 90 वर्षीय मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

