हिमाचल में फर्जी कृषक प्रमाण पत्र से करोड़ों की जमीनों के सौदों का आरोप, राजगढ़ पुलिस ने दर्ज किया केस
राजगढ़ (सिरमौर): हिमाचल प्रदेश में फर्जी कृषक प्रमाण पत्र के आधार पर जमीनों की खरीद-फरोख्त का कथित मामला सामने आया है। आरोप है कि जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सोलन, शिमला और सिरमौर समेत प्रदेश के कई जिलों में करोड़ों रुपये की संपत्तियों के सौदे किए गए। शिकायत मिलने के बाद राजगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस में शिकायत चौपाल निवासी प्रदीप कुमार ने दर्ज करवाई है। उन्होंने मोहाली निवासी संदीप कुमार और उसके कुछ सहयोगियों पर धोखाधड़ी करने तथा फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन खरीदने के आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपियों ने हिमाचल प्रदेश भूमि सुधार एवं भू-व्यवस्था अधिनियम, 1972 की धारा 118 के नियमों से बचने के लिए कथित तौर पर जाली कृषक प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया। आरोप है कि संदीप कुमार ने मंडी जिले के सरकाघाट से यह प्रमाण पत्र बनवाया था। इसके लिए अपनी पहचान और पिता के नाम में बदलाव करते हुए दूसरे व्यक्ति सुरजीत कुमार को पिता दर्शाया गया, ताकि खुद को हिमाचल का कृषक साबित किया जा सके।

शिकायत में बताया गया है कि इसी प्रमाण पत्र के आधार पर 26 मार्च 2024 को राजगढ़ के नया नेटी क्षेत्र में जमीन की रजिस्ट्री करवाई गई। इसके बाद कंडाघाट, पझौता और शिमला के सुन्नी क्षेत्र में भी जमीनों के सौदे किए जाने का आरोप है।
इतना ही नहीं, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए कुछ संपत्तियां संदीप कुमार के बेटे वंश लुथरा के नाम करवाने की बात भी शिकायत में कही गई है। शिकायतकर्ता ने अलग-अलग पतों पर बने कई आधार कार्डों के इस्तेमाल की आशंका भी जताई है।

राजगढ़ के डीएसपी विद्या चंद नेगी ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 465, 468, 471, 420 और 120-बी के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
पुलिस अब कृषक प्रमाण पत्र, पहचान संबंधी दस्तावेजों और जमीनों की रजिस्ट्रियों की जांच कर रही है। फिलहाल मामले में जांच जारी है।



