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AI : एआई की सलाह पड़ सकती है भारी! रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा, 50% सवालों के जवाब देता है गलत

AI : एआई की सलाह पड़ सकती है भारी! रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा, 50% सवालों के जवाब देता है गलत

AI : एआई की सलाह पड़ सकती है भारी! रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा, 50% सवालों के जवाब देता है गलत

AI : एआई की सलाह पड़ सकती है भारी! रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा, 50% सवालों के जवाब देता है गलत

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AI : आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हम जाने-अनजाने में कई तरह से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। एआई टूल्स आने से पहले लोग किसी टॉपिक के बारे में जानने के लिए इंटरनेट पर सर्च करते थे।

AI : एआई की सलाह पड़ सकती है भारी! रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा, 50% सवालों के जवाब देता है गलत

कुछ लोग यूट्यूब वीडियोज देखकर भी यह जानकारी लेते थे, लेकिन अब हर सवाल का जवाब चैटबॉट्स (जैसे ChatGPT, Gemini या Meta AI) पर ढूंढा जा रहा है। यहां तक की लोग अपनी हेल्थ के बारे में भी चैटबॉट्स से पूछते है। ऐसे में आप भी छोटी-मोटी बीमारी या डाइट चार्ट के लिए चैटबॉट्स पर निर्भर हैं तो संभल जाइए।

एआई के “डॉक्टर” बनने के दावों पर खड़े हुए सवाल
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) में प्रकाशित एक नई रिसर्च ने एआई के “डॉक्टर” बनने के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। British medical journal में पब्लिश रिसर्च के अनुसार अगर आप एआई से सेहत से जुड़े सवाल पूछते हैं तो यह आपके लिए खतरनाक हो सकता है।

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50 प्रतिशत जवाब गलत
रिसर्च के अनुसार AI से सेहत से जुड़े सवाल पर लगभग 50 प्रतिशत जवाब गलत होते हैं। एआई चैटबॉट्स से मिली जानकारी काफी हद तक गलत हो सकती है। एक रिसर्च के अनुसार वैज्ञानिक की एक टीम ने एआई टूल्स जैसे जेमिनाई, डीपसीक, मेटा एआई, चैटजीपीटी और ग्रोक पर काफी रिसर्च की है।

उन्होंने सेहत से जुड़े कई सावल पूछे। इस दौरान जहां कैंसर और वैक्सीन जैसे गंभीर और व्यापक डेटा वाले मुद्दों पर एआई के जवाब काफी हद तक सही पाए गए, वहीं पोषण (Nutrition) और स्टेम सेल जैसे विषयों पर एआई की जानकारी काफी कमजोर निकली।

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सबसे बड़ा खतरा ‘कॉन्फिडेंट’ गलतियां
एआई के साथ सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह गलत जानकारी को भी इतने आत्मविश्वास के साथ पेश करता है कि यूजर उसे सच मान लेता है। अक्सर इन जवाबों के साथ पर्याप्त चेतावनी या डिस्क्लेमर नहीं होते, जिससे आम यूजर सही और गलत के बीच का फर्क नहीं समझ पाता।

यूजर गलत को भी सही मान लेते हैं। साथ ही एआई के जवाब भरोसेमंद नहीं होते हैं। कई बार एआई ऐसे स्रोत का जिक्र करते हैं जो कि यकीकत में होता ही नहीं है।

Disclaimer: प्रिय पाठक, यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है। हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है। न्यूज़ घाट इसकी पुष्टि नहीं करता है। आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत या स्किन से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

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Written by News Ghat

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